देश | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 अप्रैल 2026
लोकसभा और विधानसभा चुनावों की मतदान प्रक्रिया खत्म होते ही आम जनता पर महंगाई का बड़ा झटका लगा है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का फैसला लिया गया है। नए आदेश के मुताबिक पेट्रोल की कीमत में 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 12.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे देशभर में ईंधन महंगा हो गया है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने चुनाव प्रचार के दौरान ही यह आशंका जताई थी कि मतदान खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जाएंगे। दोनों नेताओं ने बार-बार आरोप लगाया था कि चुनाव के दौरान कीमतों को जानबूझकर रोका गया है ताकि जनता को राहत का एहसास कराया जा सके, और जैसे ही मतदान पूरा होगा, दाम बढ़ा दिए जाएंगे।
सरकार की ओर से जारी आदेश में साफ कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जो हाल के महीनों में 100 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुका है। इसके कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है। पेट्रोल पर करीब 24.40 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 104.99 रुपये प्रति लीटर तक के नुकसान (अंडर-रिकवरी) का हवाला देते हुए सरकार ने कीमतें बढ़ाने को जरूरी कदम बताया है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित रखने से तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो जाती है और इससे देशभर में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। सरकार का तर्क है कि बाजार आधारित मूल्य व्यवस्था को बनाए रखने और तेल कंपनियों को स्थिर रखने के लिए कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया था।
अब कीमतों में बढ़ोतरी के बाद विपक्ष का कहना है कि उनकी चेतावनी सही साबित हुई है। उनका आरोप है कि सरकार ने चुनावी माहौल में महंगाई को छिपाकर रखा और मतदान खत्म होते ही आम लोगों पर बोझ डाल दिया। विपक्ष इसे आम जनता के साथ धोखा बताते हुए कह रहा है कि इसका सीधा असर हर घर के बजट पर पड़ेगा।
पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, दूध और अन्य जरूरी सामानों के दाम भी बढ़ सकते हैं। यानी आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ने की संभावना है।
चुनाव खत्म होते ही ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने एक बार फिर महंगाई के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। सरकार इसे अंतरराष्ट्रीय हालात और आर्थिक मजबूरी बता रही है, जबकि विपक्ष इसे पहले से तय फैसला करार दे रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस बढ़ोतरी का असर आम आदमी की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर कितना गहरा पड़ता है।




