राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 9 अक्टूबर 2026
कथित ‘वोट चोरी’ और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने अपनी मांगें रखते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठाई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समेत विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष ने मांग की कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच हो, प्रभावित मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय की जाए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति को बताया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल हैं और विपक्ष के आरोपों के मुताबिक चुनाव आयोग भी कथित ‘वोट चोरी’ में शामिल है। खड़गे ने दोहराया कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से EVM हटाकर बैलेट पेपर की व्यवस्था बहाल करने के पक्ष में है। विपक्ष का तर्क है कि चुनाव व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मतगणना और मतदाता सूची की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग की कथित संलिप्तता और ‘वोट चोरी’ के आरोप विपक्ष के दावे हैं, जिनकी पुष्टि स्वतंत्र जांच और प्रस्तुत किए जाने वाले सबूतों के आधार पर ही हो सकती है।
खड़गे ने बताया कि राष्ट्रपति ने विपक्षी नेताओं से ‘वोट चोरी’ के आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष इन सबूतों को एकत्र कर रहा है और उन्हें राष्ट्रपति के सामने प्रस्तुत करेगा। कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, राष्ट्रपति ने उनकी बात ध्यान से सुनी और इस मामले में संज्ञान लेकर उचित कदम उठाने की बात कही। खड़गे ने राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत पर संतुष्टि जताते हुए कहा कि विपक्ष ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवाल और चिंताएं सीधे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के सामने रखी हैं।
विपक्ष की मांगें केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और बैलेट पेपर की वापसी तक सीमित नहीं हैं। INDIA गठबंधन ने SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए नामों को बहाल करने की मांग भी की है। विपक्ष के ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी प्रतिरक्षा देने वाले वर्ष 2023 के कानून को निरस्त करने की मांग भी शामिल बताई गई है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया से जुड़े सवालों का संतोषजनक समाधान किए बिना चुनावी व्यवस्था पर भरोसा कायम रखना मुश्किल होगा।
खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। विपक्ष का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विवादों को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप मानकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, इन आरोपों पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। किसी संस्था या पदाधिकारी की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए आरोपों के साथ उपलब्ध दस्तावेजों, चुनावी आंकड़ों और संबंधित पक्षों के जवाबों की जांच आवश्यक होगी।
राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी, लेकिन कई सांसदों को विजय चौक पर पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल के चुनिंदा नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में खड़गे, राहुल गांधी और ममता बनर्जी के अलावा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा और अन्य विपक्षी नेता भी शामिल थे।
राहुल गांधी ने संकेत दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को आगे न्यायिक स्तर पर भी उठाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने का प्रयास करेगा। इस कदम के जरिए गठबंधन चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अपनी शिकायतों को संवैधानिक और न्यायिक मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है।
राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के बाद अब विपक्ष की अगली चुनौती अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत प्रस्तुत करना है। SIR पर रोक, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांगों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल, राष्ट्रपति के समक्ष उठाए गए इन मुद्दों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।



