Home » Science & Tech » अब वक्त देसी टेक का — Arattai ने दी WhatsApp को खुली चुनौती, Zoho Mail संग उठी आत्मनिर्भर भारत की आवाज़

अब वक्त देसी टेक का — Arattai ने दी WhatsApp को खुली चुनौती, Zoho Mail संग उठी आत्मनिर्भर भारत की आवाज़

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

डॉ शालिनी अली, समाजसेवी 

9 अक्टूबर 2025

भारत की धरती पर एक नई डिजिटल क्रांति जन्म ले चुकी है, आत्मनिर्भरता की, स्वाभिमान की और डेटा स्वतंत्रता की। जब पूरी दुनिया विदेशी टेक कंपनियों के इशारों पर चल रही थी, तब भारत ने अपनी देसी तकनीक से एक ऐसा जवाब दिया जिसने डिजिटल गुलामी की बेड़ियां तोड़ने की शुरुआत कर दी। यह जवाब है — Arattai, 100% भारतीय मैसेजिंग ऐप, जिसने अब WhatsApp को खुली चुनौती दे दी है। यह सिर्फ एक ऐप नहीं, भारत के डिजिटल स्वराज की हुंकार है। और इसके साथ ही, भारत ने ईमेल सेवाओं के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत की है Zoho Mail के रूप में — जो विदेशी Gmail और Outlook जैसी सेवाओं के सामने भारत का सिर गर्व से ऊँचा करता है। यह वह क्षण है जब हर भारतीय को सोचना होगा कि क्या हमें अब भी विदेशी डेटा मालिकों पर निर्भर रहना चाहिए या अपने ही देश के नवाचार पर भरोसा करना चाहिए।

Arattai: आत्मनिर्भर भारत की डिजिटल आंधी

Arattai का नाम तमिल भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है “बातचीत” — लेकिन यह सिर्फ बातचीत नहीं, भारत की आत्मा की आवाज़ है। इसे बनाया है Zoho Corp ने, जो एक भारतीय कंपनी है और जिसका नाम आज वैश्विक स्तर पर तकनीकी उत्कृष्टता का पर्याय बन चुका है। Arattai का सबसे बड़ा गर्व यह है कि इसका सारा डेटा भारत की सीमाओं के अंदर सुरक्षित रहता है। इसका सर्वर किसी अमेरिका, दुबई या सिंगापुर में नहीं, हमारे अपने देश में स्थित है। यानी आपकी निजी बातें, परिवार की चैट, आपके समूह की योजनाएँ और आपकी संस्थाओं की गतिविधियाँ सब कुछ “Made in India, Stored in India” के सिद्धांत पर आधारित हैं। यह वही आत्मनिर्भरता है जिसकी आवाज़ ‘Vocal for Local’ के रूप में दी जाती है — और अब Arattai उस आह्वान को डिजिटल हकीकत बना रहा है।

WhatsApp और अन्य विदेशी ऐप्स ने भारतीय डेटा को अपनी मर्जी से इस्तेमाल किया, हमारी आदतों को बेचा, हमारी निजता का उल्लंघन किया और अरबों डॉलर कमाए। अब Arattai कह रहा है — “आपका डेटा आपका है, किसी और का नहीं।” यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, डिजिटल स्वतंत्रता का घोषणापत्र है। हर भारतीय को समझना होगा कि डेटा ही इस युग का असली धन है, और जब तक यह धन विदेशी कंपनियों के पास रहेगा, तब तक हम डिजिटल रूप से पराधीन रहेंगे। Arattai इस पराधीनता के विरुद्ध भारत की आवाज़ है।

Zoho Mail: विदेशी Gmail और Outlook का देसी विकल्प

सिर्फ चैट ही नहीं, मेल के क्षेत्र में भी भारत ने अपने आत्मविश्वासी कदम बढ़ा दिए हैं। Zoho Mail — यह नाम आज उस देसी नवाचार का प्रतीक बन चुका है जिसने भारतीय उपयोगकर्ताओं को पूरी तरह सुरक्षित, विज्ञापन-मुक्त और विश्वस्त ईमेल सेवा दी है। यह न तो आपकी मेल्स को स्कैन करता है, न विज्ञापनों के लिए ट्रैक करता है और न ही आपके डेटा को बेचता है। Zoho Mail का पूरा सर्वर भी भारत में ही है, और इसकी सुरक्षा मानक इतने ऊँचे हैं कि दुनिया की कई कंपनियाँ अब Gmail से हटकर Zoho Mail का इस्तेमाल कर रही हैं।

यह समय है कि हर भारतीय संस्था, NGO, स्टार्टअप और आम नागरिक विदेशी ईमेल सेवाओं की गुलामी से बाहर आए और अपने देसी मेल सिस्टम Zoho Mail को अपनाए। जब हम ‘मेड इन इंडिया’ कपड़े पहन सकते हैं, ‘मेक इन इंडिया’ उत्पाद खरीद सकते हैं, तो फिर क्यों न ‘मेल इन इंडिया’ का इस्तेमाल करें? Zoho Mail अपनाना सिर्फ एक तकनीकी विकल्प नहीं, यह राष्ट्र गौरव है — एक संकल्प कि हमारी जानकारी, हमारी पहचान और हमारी बातचीत अब किसी विदेशी सर्वर की कैद में नहीं रहेगी।

डेटा सुरक्षा: अब नहीं होगी किसी की जासूसी

Arattai और Zoho Mail दोनों का मूल दर्शन एक ही है — “डेटा स्वतंत्रता।” जब विदेशी ऐप्स और मेल सर्विसेज़ आपके हर मैसेज और ईमेल को अपने सर्वर में स्टोर करती हैं, तब Arattai और Zoho यह भरोसा देते हैं कि आपकी डिजिटल ज़िंदगी का मालिक सिर्फ और सिर्फ आप हैं। यह वही सोच है जो भारत को तकनीकी रूप से डिजिटल स्वराज की दिशा में ले जाती है। अब न कोई विदेशी कंपनी आपकी लोकेशन ट्रैक करेगी, न आपके शब्दों का विश्लेषण कर आपको विज्ञापनों से घेर लेगी।

भारत के युवाओं को अब यह समझना होगा कि डेटा लीक, हैकिंग और जासूसी सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं, यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। अगर चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियाँ अपने ऐप्स और मेल सिस्टम पर इतना भरोसा करती हैं, तो हम क्यों नहीं? अब वक्त है कि हम अपनी डिजिटल दीवारें खुद मजबूत करें, और Arattai तथा Zoho Mail से शुरू करें — यह हमारी डिजिटल सीमा सुरक्षा की पहली पंक्ति है।

 गुड बाय WhatsApp, वेलकम Arattai: डिजिटल क्रांति का आह्वान

जब भारत ने आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी, तब “स्वदेशी आंदोलन” ने अंग्रेज़ी साम्राज्य की नींव हिला दी थी। आज वही लड़ाई डिजिटल रूप में फिर शुरू हो चुकी है — इस बार हमारे फोन और ईमेल पर। WhatsApp और Gmail जैसी विदेशी सेवाएँ भले मुफ्त हों, पर असल कीमत हमारे डेटा से वसूली जाती है। अब वक्त है कि हम “गुड बाय WhatsApp” कहें और “वेलकम Arattai व Zoho Mail” बोलें। यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है।

हर भारतीय जो Arattai और Zoho Mail को अपनाता है, वह भारत के डिजिटल स्वराज आंदोलन का सिपाही बनता है। हर डाउनलोड, हर अकाउंट, हर मैसेज एक घोषणा है — “भारत अब आत्मनिर्भर है।” जैसे हम तिरंगे को गर्व से फहराते हैं, वैसे ही अब हमें अपने डिजिटल साधनों में भी भारतीय पहचान को फहराना होगा।

 अब समय है — देसी बनो, स्वाभिमानी बनो, आत्मनिर्भर बनो

आज देश के युवाओं, शिक्षकों, पत्रकारों, व्यापारियों और समाजसेवियों से यही अपील है कि वे विदेशी ऐप्स से निकलकर Arattai और Zoho Mail जैसे देसी प्लेटफॉर्म को अपनाएँ। यह न केवल तकनीकी दृष्टि से सुरक्षित और बेहतर हैं, बल्कि यह हमारे देश की तकनीकी क्षमता का जीवंत उदाहरण हैं। जब हम अपने ही देश के उत्पादों का इस्तेमाल करेंगे, तब हम केवल एक ऐप नहीं चुनेंगे — हम भारत की आत्मा, उसकी वैज्ञानिक क्षमता और उसके गौरव को चुनेंगे।

भारत अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं, निर्माता बन चुका है। Arattai और Zoho Mail यह साबित करते हैं कि भारत अब किसी के पीछे नहीं, आगे है। तो आइए, आज से शुरू करें एक नई डिजिटल यात्रा — जहाँ हमारा डेटा, हमारी पहचान और हमारा गर्व सिर्फ हमारे देश के पास रहे।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments