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अब AI बताएगा पांच साल पहले ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क 22 दिसंबर 2025

मैमोग्राम से भविष्य की झलक: एआई पकड़ेगा ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम

ब्रेस्ट कैंसर आज भी दुनिया भर में महिलाओं की जान लेने वाली सबसे बड़ी बीमारियों में शामिल है। हर साल लाखों नए मामले सामने आते हैं और कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब इलाज मुश्किल हो जाता है। लेकिन अब विज्ञान और तकनीक के मेल से एक ऐसी उम्मीद जगी है, जो इस खतरे को पांच साल पहले ही पहचान सकती है।

जर्मनी में वैज्ञानिकों ने एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल विकसित किया है, जो सिर्फ मैमोग्राम की तस्वीर देखकर यह अनुमान लगा सकता है कि किसी महिला में आने वाले पांच साल में ब्रेस्ट कैंसर होने का कितना जोखिम है।

क्यों जरूरी है नई तकनीक?

आरडब्ल्यूटीएच आखन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल की रेडियोलॉजी विभाग प्रमुख डॉ. क्रिस्टियान कूल बताती हैं कि मैमोग्राफी के बावजूद ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह यह है कि कई बार मैमोग्राफी शुरुआती चरण में कैंसर को पकड़ ही नहीं पाती, खासकर वे ट्यूमर जो तेजी से बढ़ते हैं और ज्यादा खतरनाक होते हैं।

डॉ. कूल के मुताबिक, “कई आक्रामक ट्यूमर मैमोग्राफी में दिखते ही नहीं और यही वे मामले होते हैं, जो जानलेवा साबित होते हैं।”

कैसे काम करता है यह एआई?

यह नया एआई मॉडल मैमोग्राम की तस्वीरों का गहराई से विश्लेषण करता है। यह न सिर्फ स्तन ऊतक की घनता (डेंसिटी) देखता है, बल्कि उसकी बनावट और पैटर्न को भी समझता है। इन्हीं संकेतों के आधार पर यह तय करता है कि महिला लो-रिस्क, मीडियम-रिस्क या हाई-रिस्क श्रेणी में आती है।

एक अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं को एआई ने “हाई रिस्क” बताया, उनमें ब्रेस्ट कैंसर होने की संभावना सामान्य महिलाओं की तुलना में चार गुना ज्यादा थी। खास बात यह है कि इस एआई को परिवार के मेडिकल इतिहास, जीन या जीवनशैली से जुड़ी जानकारी की जरूरत नहीं होती। यह सिर्फ मैमोग्राम के आधार पर जोखिम बता देता है।

सबके लिए एक जैसी जांच क्यों नहीं?

जर्मनी में 50 से 75 साल की महिलाओं को हर दो साल में मैमोग्राफी कराई जाती है। लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि हर महिला का जोखिम अलग होता है, इसलिए “एक जांच सबके लिए” वाला तरीका अब पुराना हो चुका है।

डॉ. कूल कहती हैं कि जिन महिलाओं के स्तन ऊतक ज्यादा घने होते हैं, उनमें कैंसर का खतरा भी ज्यादा होता है और मैमोग्राफी की सटीकता भी कम हो जाती है। कई महिलाओं को यह जानकारी होती ही नहीं कि घने ऊतक में कैंसर छिपा रह सकता है।

मैमोग्राफी से आगे, एमआरआई की भूमिका

विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन महिलाओं में जोखिम ज्यादा होता है, उनके लिए एमआरआई स्कैन ज्यादा भरोसेमंद है। यह तकनीक शरीर की बेहद साफ और विस्तृत तस्वीर देती है और शुरुआती चरण में कैंसर को बेहतर ढंग से पकड़ सकती है। हालांकि, यह जांच महंगी होती है।

इसी वजह से वैज्ञानिकों ने “क्लेरिटी ब्रेस्ट” नाम का यह एआई मॉडल तैयार किया है, जो कुछ ही सेकंड में यह बता सकता है कि किस महिला को एमआरआई की जरूरत है और किसे नहीं। यह मॉडल यूरोप, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के चार लाख से ज्यादा मैमोग्राम पर प्रशिक्षित किया गया है।

क्या कम उम्र में जांच शुरू होनी चाहिए?

अधिकतर देशों में ब्रेस्ट कैंसर की नियमित जांच 50 साल की उम्र के बाद शुरू होती है। लेकिन डॉ. कूल का मानना है कि अगर यह एआई सही साबित होता है, तो कम उम्र की महिलाओं को भी इसका फायदा मिल सकता है। कम उम्र में कैंसर का खतरा भले कम हो, लेकिन अगर होता है तो वह ज्यादा आक्रामक हो सकता है।

हालांकि, वह साफ करती हैं कि सिर्फ स्क्रीनिंग की उम्र घटा देना समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, सही रास्ता यह है कि पहले मैमोग्राफी हो, फिर एआई के जरिए जोखिम का आकलन किया जाए और जरूरत पड़ने पर एमआरआई कराई जाए।

उम्मीद की नई किरण

यह एआई तकनीक ब्रेस्ट कैंसर की पहचान और रोकथाम के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। अगर खतरा पहले ही पता चल जाए, तो समय रहते इलाज संभव है और हजारों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए यह तकनीक एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है।

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