पटना/नई दिल्ली 15 दिसंबर 2025
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठनात्मक इतिहास में यह दिन बिहार और पूर्वी भारत के लिए खास बन गया, जब पटना के बांकीपुर से लगातार पांच बार विधायक और बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री नितिन नवीन ने बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में औपचारिक रूप से पदभार संभाल लिया। दिल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रतीकात्मक रूप से नितिन नवीन को कुर्सी पर बिठाकर जिम्मेदारी सौंपी। यह दृश्य सिर्फ औपचारिकता नहीं था, बल्कि इसके जरिए शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट संदेश दिया कि संगठन की कमान अब नई पीढ़ी के हाथों में सौंपी जा रही है।
दिल्ली पहुंचते ही नितिन नवीन का जोरदार स्वागत किया गया। एयरपोर्ट से लेकर पार्टी कार्यालय तक समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी। बीजेपी कार्यालय को पोस्टरों, नारों और स्वागत बैनरों से सजाया गया था। “नितिन नवीन जिंदाबाद” के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी उनका स्वागत किया, जिससे यह साफ हो गया कि यह नियुक्ति केवल बिहार तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के बड़े समीकरणों से जुड़ी है।
इससे पहले पटना में नितिन नवीन ने अपने दिन की शुरुआत धार्मिक और भावनात्मक क्षणों के साथ की। उन्होंने प्रसिद्ध महावीर मंदिर में पूजा-अर्चना कर भगवान हनुमान का आशीर्वाद लिया और उसके बाद राजवंशी नगर स्थित नवीन सिन्हा स्मृति पार्क पहुंचकर अपने पिता और पूर्व विधायक नवीन सिन्हा को नमन किया। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि कर्म और आशीर्वाद—दोनों जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं। उनके इस कदम को उनके जमीनी और संस्कारयुक्त नेतृत्व की छवि से जोड़कर देखा जा रहा है।
बीजेपी नेतृत्व ने नितिन नवीन की नियुक्ति को “दूरदर्शी और ऐतिहासिक” बताया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि बीजेपी के संसदीय बोर्ड ने नितिन नवीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है और यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा। खास बात यह है कि नितिन नवीन पूर्वी भारत से बीजेपी के पहले राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने हैं, जिसे क्षेत्रीय संतुलन और भविष्य की रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
नितिन नवीन भले ही उम्र में युवा हों, लेकिन उनका राजनीतिक सफर लंबा और बहुआयामी रहा है। वर्ष 2006 में पहली बार विधायक बनने के बाद वे 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज कर चुके हैं। वर्ष 2021 में पहली बार उन्हें नीतीश सरकार में मंत्री बनाया गया और पथ निर्माण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। बाद में वे नगर विकास एवं आवास मंत्री भी बने। संगठन में वे युवा मोर्चा से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। छत्तीसगढ़ और सिक्किम जैसे राज्यों में चुनाव प्रभारी के रूप में उनकी भूमिका को पार्टी नेतृत्व ने खास तौर पर सराहा है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि नितिन नवीन आने वाले समय में मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के रूप में उभर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो वे पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। साथ ही “एक व्यक्ति, एक पद” के सिद्धांत के तहत भविष्य में उन्हें बिहार सरकार के मंत्री पद से भी इस्तीफा देना पड़ सकता है। यह संभावना भी जताई जा रही है कि संगठनात्मक परंपरा के अनुसार उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है।
इसी दिन बिहार बीजेपी संगठन में भी बड़ा बदलाव किया गया। दरभंगा से विधायक और पूर्व मंत्री संजय सरावगी को बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वे दिलीप जायसवाल की जगह लेंगे, जिन्होंने “एक पद, एक जिम्मेदारी” के सिद्धांत के तहत प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ा। संजय सरावगी वैश्य समुदाय से आते हैं और मिथिलांचल क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी नियुक्ति को बीजेपी की क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, नितिन नवीन की ताजपोशी और संजय सरावगी की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति यह संकेत देती है कि बीजेपी अब बिहार और पूर्वी भारत को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। संगठन, नेतृत्व और चुनावी प्रबंधन—तीनों स्तरों पर यह फैसला आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।




