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9 साल बाद भी नेपाल में फेल साबित हुआ चीन का BRI! वादों, बैठकों और विवादों में उलझा ‘ड्रैगन प्रोजेक्ट’

अंतरराष्ट्रीय | समी अहमद | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 12 मई 2026

चीन का महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) नेपाल में नौ साल बाद भी जमीन पर उतरता नहीं दिख रहा है। बड़े-बड़े वादों, हाई-प्रोफाइल बैठकों और रणनीतिक घोषणाओं के बावजूद नेपाल को BRI से अब तक कोई बड़ा फायदा नहीं मिला है। हालात ऐसे हैं कि नेपाल में BRI अब “विकास परियोजना” कम और “अधूरे सपनों” का प्रतीक ज्यादा बनता जा रहा है।

12 मई 2017 को नेपाल और चीन ने BRI समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस मेगा योजना का मकसद एशिया, यूरोप और अफ्रीका को सड़क, रेल, बंदरगाह और डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना था। नेपाल को उम्मीद थी कि वह “लैंडलॉक” देश से “लैंड-लिंक” अर्थव्यवस्था में बदल जाएगा। लेकिन नौ साल बाद तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, BRI के तहत नेपाल में अब तक सिर्फ सेमिनार, राजनीतिक बयानबाजी और कूटनीतिक मुलाकातें ही हुई हैं। जमीन पर कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा नहीं हो पाया। चीन ने एकतरफा तरीके से पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को BRI परियोजना बताया, लेकिन नेपाल सरकार ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया। बाद में यही एयरपोर्ट अरबों रुपये के भ्रष्टाचार विवाद में घिर गया।

नेपाल और चीन के बीच BRI के तहत रेलवे, सड़क, ऊर्जा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर वर्षों तक चर्चा होती रही, लेकिन वित्तीय मॉडल, कर्ज शर्तों और निवेश ढांचे पर सहमति नहीं बन पाई। चीन लोन आधारित मॉडल चाहता था, जबकि नेपाल अनुदान आधारित सहायता पर जोर देता रहा।

अब बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह BRI को किस नजरिए से देखेगी। माना जा रहा है कि नई सरकार पुराने समझौतों की समीक्षा कर सकती है और चीन के साथ नए सिरे से शर्तें तय कर सकती है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हाल के महीनों में नेपाल में चीन की चिंता सिर्फ BRI तक सीमित नहीं रही। चीनी अधिकारियों ने नेपाल सरकार पर अमेरिकी प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। खासकर अमेरिका के MCC प्रोजेक्ट, State Partnership Program (SPP) और Elon Musk की Starlink इंटरनेट सेवा को लेकर चीन काफी सतर्क दिख रहा है।

नेपाल के कई अधिकारियों ने दावा किया कि चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने नेपाल सरकार से कहा कि वह Starlink को अनुमति न दे और अमेरिकी सुरक्षा कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखे। चीन चाहता है कि नेपाल में Huawei जैसी चीनी कंपनियों को डिजिटल और इंटरनेट ढांचे में प्राथमिकता मिले।

इसके अलावा चीन ने तिब्बती शरणार्थियों के मुद्दे को भी अपनी “कोर स्ट्रैटेजिक चिंता” बताया है। रिपोर्ट के अनुसार चीनी अधिकारी नेपाल से लगातार यह सुनिश्चित करने को कह रहे हैं कि तिब्बती गतिविधियां चीन विरोधी मंच न बनें।

2017 में नेपाल ने BRI के तहत चीन को 35 परियोजनाओं का प्रस्ताव दिया था। बाद में चीन के कहने पर यह सूची घटाकर 9 कर दी गई। लेकिन आज तक केवल केरुंग-काठमांडू रेलवे परियोजना का व्यवहार्यता अध्ययन ही आगे बढ़ पाया है। बाकी परियोजनाएं फाइलों और बैठकों में ही अटकी हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल अब BRI को लेकर पहले जितना उत्साहित नहीं है। श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट विवाद और पाकिस्तान के CPEC मॉडल ने नेपाल को भी सतर्क कर दिया है। नेपाल में यह डर बढ़ा है कि कहीं BRI “कर्ज के जाल” में बदलकर उसकी रणनीतिक स्वतंत्रता को प्रभावित न कर दे।

नेपाल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड एंगेजमेंट के रिसर्च डायरेक्टर प्रमोद जायसवाल का कहना है कि नेपाल में BRI को लेकर राष्ट्रीय सहमति ही नहीं बन पाई है। कई राजनीतिक दल और रणनीतिक विशेषज्ञ इसे चीन के प्रभाव विस्तार की परियोजना मानते हैं।

हालांकि चीन समर्थक विशेषज्ञ अब भी मानते हैं कि BRI नेपाल के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। उनका कहना है कि चीन-नेपाल रेलवे, ड्राई पोर्ट, ऊर्जा कनेक्टिविटी और व्यापारिक गलियारे नेपाल की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।

लेकिन फिलहाल जमीनी हकीकत यही है कि नौ साल बाद भी नेपाल में BRI “वादों की राजनीति” से आगे नहीं बढ़ पाया है। चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना नेपाल में अब तक सिर्फ कूटनीतिक चर्चाओं, रणनीतिक तनाव और अधूरी उम्मीदों तक सीमित नजर आ रही है।

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