अवधेश कुमार | नई दिल्ली 23 नवंबर 2025
भारत के नव-नियुक्त मुख्य न्यायाधीश-डिज़िग्नेट जस्टिस सूर्या कांत ने अपने कार्यकाल की सबसे पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता साफ कर दी है – सुप्रीम कोर्ट में इस समय लंबित लगभग 90,225 मामलों के विशाल बोझ को “व्यवस्थित और प्रबंधनीय स्तर” तक लाना। रविवार को अपनी आधिकारिक आवास 7, कृष्णा मेनन मार्ग पर मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में हो रही देरी आम नागरिक के न्याय पाने के अधिकार पर भारी पड़ रही है और इसे हर हाल में कम करना उनकी सर्वोच्च जिम्मेदारी होगी। जस्टिस सूर्या कांत का स्पष्ट मानना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट खुद तेजी से और प्रभावी ढंग से काम नहीं करेगा, तब तक निचली अदालतों से भी वैसी ही तेजी की उम्मीद नहीं की जा सकती।
नए सीजेआई ने अपनी रणनीति भी खुलकर बताई। उनका फोकस सबसे पहले उन बड़े और मूलभूत संवैधानिक सवालों वाले मामलों पर होगा जिनके कारण हजारों-हजार अन्य मामले अटके पड़े हैं। जस्टिस सूर्या कांत ने कहा कि जल्द से जल्द इन महत्वपूर्ण मामलों की पहचान कर पांच, सात, नौ या उससे बड़ी संविधान पीठों का गठन किया जाएगा। उनका विश्वास है कि एक बार इन मातृ-मामलों (mother cases) पर अंतिम और स्पष्ट फैसला आ गया, तो उनसे जुड़े सैकड़ों-हजारों छोटे-बड़े मामले या तो खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगे या उनका निपटारा कुछ ही मिनटों में हो सकेगा। इस तरह वे एक साथ हजारों फाइलों को हमेशा के लिए बंद करने की योजना बना रहे हैं।
सोमवार, 24 नवंबर 2025 को जस्टिस सूर्या कांत भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में राष्ट्रपति भवन में औपचारिक शपथ लेंगे और मौजूदा सीजेआई जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई की जगह लेंगे। अपने लगभग डेढ़ साल के छोटे से कार्यकाल में भी वे न्याय व्यवस्था के सबसे पुराने और सबसे बड़े दर्द – लंबित मामलों – को जड़ से कम करने का संकल्प ले चुके हैं। देश की सबसे बड़ी अदालत के नए कप्तान की यह पहली सार्वजनिक प्रतिबद्धता लाखों-करोड़ों न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर आई है।




