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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अपनी ही पार्टी में घिरे, सांसदों ने उठाए कार्यशैली पर सवाल

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 16 जुलाई 2026

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को पद संभाले अभी चार महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार के सामने राजनीतिक चुनौतियां तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही हैं। विपक्ष पहले से ही उनकी नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठा रहा था, लेकिन अब असंतोष उनकी अपनी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के भीतर भी खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई सांसदों ने सार्वजनिक रूप से शिकायत की है कि सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया अत्यधिक केंद्रीकृत होती जा रही है और निर्वाचित सांसदों को महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। इससे यह संकेत मिल रहा है कि युवा नेतृत्व और बदलाव के वादे के साथ सत्ता में आई सरकार के भीतर समन्वय की चुनौती बढ़ रही है।

प्रतिनिधि सभा की हालिया बैठक में आरएसपी सांसद जगदीश खरेल ने सरकार की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल प्रधानमंत्री की लोकप्रियता के भरोसे सरकार नहीं चलाई जा सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सांसदों की भूमिका सिर्फ सदन में बैठकर मेज थपथपाने तक सीमित कर दी जाएगी, तो न जनप्रतिनिधि संतुष्ट होंगे और न ही जनता का विश्वास कायम रहेगा। खरेल ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सांसदों की भागीदारी केवल समर्थन देने तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भूमिका भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी का सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी के भीतर नाराजगी केवल सांसदों की भूमिका तक सीमित नहीं है। कई नेताओं का मानना है कि सरकार के अहम फैसलों पर व्यापक विचार-विमर्श के बजाय शीर्ष स्तर पर ही निर्णय लिए जा रहे हैं। यही कारण है कि आरएसपी के कुछ सांसद संगठनात्मक संवाद बढ़ाने और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया अपनाने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि पार्टी ने पारदर्शिता, जवाबदेही और सहभागी लोकतंत्र के वादे के साथ चुनाव जीता था, इसलिए सरकार की कार्यशैली भी उन्हीं सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।

उधर विपक्षी दल भी इस अवसर का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि बालेन शाह की सरकार अनुभव की कमी से जूझ रही है और प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित गति से फैसले लागू नहीं हो पा रहे हैं। हाल के दिनों में सरकार को कई अन्य मुद्दों पर भी आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिनमें काठमांडू में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, विरोध प्रदर्शनों से निपटने का तरीका और युवाओं के बीच बढ़ता असंतोष शामिल है। इन घटनाओं ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है।

बालेन शाह नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के प्रतीक बनकर उभरे थे। काठमांडू के मेयर के रूप में लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया और उनकी पार्टी ने 2026 के आम चुनाव में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। युवा मतदाताओं, भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे और पारदर्शी शासन के वादे ने उन्हें सत्ता तक पहुंचाया। इसी वजह से जनता की अपेक्षाएं भी उनकी सरकार से काफी अधिक हैं और अब सरकार के शुरुआती महीनों में सामने आ रहे आंतरिक मतभेदों को उनकी नेतृत्व क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि बालेन शाह की सरकार किसी तात्कालिक राजनीतिक संकट में है। आरएसपी अभी भी संसद में मजबूत बहुमत रखती है और सरकार की स्थिरता पर तत्काल कोई खतरा नहीं दिखता। लेकिन यह स्पष्ट है कि यदि पार्टी के भीतर उठ रहे सवालों का समय रहते समाधान नहीं किया गया और सांसदों की भागीदारी को लेकर असंतोष बढ़ता गया, तो इसका असर सरकार की कार्यक्षमता और राजनीतिक छवि दोनों पर पड़ सकता है। आने वाले समय में बालेन शाह के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल विपक्ष का सामना करना नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर विश्वास और समन्वय बनाए रखना भी होगी।

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