अंतरराष्ट्रीय | समी अहमद | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 14 मई 2026
नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। राष्ट्रपति Ram Chandra Paudel ने प्रधानमंत्री Balendra Shah की सिफारिश पर मंत्रिपरिषद में विभागों का नया बंटवारा कर दिया है। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक यह फेरबदल नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76(9) के तहत किया गया है। नए बदलावों के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्रालय सीधे अपने पास रखे हैं, जिसे नेपाल की सत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर उनकी मजबूत पकड़ के रूप में देखा जा रहा है।
नई जिम्मेदारियों के तहत स्वर्णिम वाग्ले को वित्त मंत्रालय सौंपा गया है, जबकि शिशिर खनाल को विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। बिराज भक्त श्रेष्ठ को ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्रालय दिया गया है। वहीं सोबिता गौतम को कानून, न्याय एवं संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता रितेश कुमार शाक्य ने बताया कि 15 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आधारभूत संरचना सहित कई अहम विभागों में बदलाव किए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि नेपाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय दबावों से जुड़ा हुआ कदम भी है। हाल के दिनों में नेपाल चीन, भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के केंद्र में रहा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा गृह और रक्षा जैसे संवेदनशील मंत्रालयों को अपने पास रखना यह संकेत देता है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक राजनीतिक नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना चाहती है।
उधर विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम पर सवाल भी उठाने शुरू कर दिए हैं। नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गगन थापा ने हाल ही में सरकार पर निजी क्षेत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ाने के आरोप लगाए थे। वहीं संसद में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी लगातार हंगामा जारी है। ऐसे माहौल में यह कैबिनेट फेरबदल नेपाल की राजनीति में आने वाले दिनों में नए समीकरण पैदा कर सकता है।
नेपाल में हाल के महीनों में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम, Everest क्षेत्र में अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा, सीमा विवाद और आर्थिक चुनौतियों ने सरकार पर दबाव बढ़ाया है। माना जा रहा है कि नई जिम्मेदारियों के जरिए प्रधानमंत्री बालेन शाह अपनी सरकार को अधिक केंद्रीकृत और निर्णायक स्वरूप देना चाहते हैं, ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मोर्चों पर मजबूत संदेश दिया जा सके।




