अनिल यादव | लखनऊ 5 जनवरी 2026
लोक गायिका और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक बोलने वाली नेहा राठौर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका कोई गीत नहीं, बल्कि उनका वह अनुभव है, जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। नेहा राठौर ने कहा है कि उनसे सवाल पूछने की कीमत वसूली गई और उन्हें उनकी “औकात” याद दिलाई गई। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिंदगी में पहली बार उन्हें कोतवाली जाना पड़ा, और यह अनुभव उनके लिए बेहद तकलीफदेह था।
नेहा राठौर का कहना है कि उन्होंने हमेशा समाज, सत्ता और सिस्टम से सवाल पूछे हैं। यही उनकी पहचान रही है। लेकिन इस बार सवाल पूछना उन्हें भारी पड़ गया। उन्होंने कहा कि जब उनसे पूछताछ हुई, तो ऐसा महसूस कराया गया जैसे सवाल पूछना कोई बहुत बड़ा अपराध हो। नेहा के शब्दों में, “अगर सच बोलना और सवाल करना गुनाह है, तो फिर मुझे फांसी दे दीजिए।” यह बयान उनके भीतर के डर, गुस्से और बेबसी—तीनों को साफ दिखाता है।
उन्होंने बताया कि कोतवाली जाना उनके लिए सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि मानसिक रूप से तोड़ देने वाला अनुभव था। वहां उन्हें बार-बार यह अहसास कराया गया कि वह कौन हैं और उनकी “हैसियत” क्या है। नेहा ने कहा कि एक कलाकार और आम नागरिक होने के नाते उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि सवाल पूछने पर इस तरह का व्यवहार झेलना पड़ेगा। यह अनुभव उन्हें अंदर तक आहत कर गया।
नेहा राठौर ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिक का अधिकार है, न कि अपराध। अगर सवालों से डर पैदा हो जाए और लोगों को चुप कराने की कोशिश की जाए, तो यह समाज के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि वह डरने वाली नहीं हैं और न ही अपनी आवाज़ बंद करेंगी। भले ही उन्हें दबाने की कोशिश की जाए, लेकिन वह सच कहना नहीं छोड़ेंगी।
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग नेहा राठौर के समर्थन में खड़े हैं और कह रहे हैं कि सवाल पूछना गुनाह नहीं होना चाहिए। वहीं, कुछ लोग उनकी आलोचना भी कर रहे हैं। लेकिन इतना साफ है कि नेहा राठौर का यह अनुभव आज के समय में अभिव्यक्ति की आज़ादी और सवाल पूछने के अधिकार पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।




