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देशव्यापी LPG संकट गहराया: बेंगलुरु से चेन्नई, मुंबई, पुणे और कोलकाता तक असर, होटल-रेस्टोरेंट बंद; ‘कोविड जैसे हालात’ की चेतावनी

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एबीसी नेशनल न्यूज | ब्यूरो रिपोर्ट | 11 मार्च 2026

देश के बड़े शहरों में कमर्शियल LPG की भारी कमी

देश भर में कमर्शियल एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) सिलेंडरों की सप्लाई में गंभीर व्यवधान के कारण हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। बेंगलुरु से शुरू हुआ यह संकट अब चेन्नई, मुंबई, पुणे, कोलकाता और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों तक फैल चुका है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, स्ट्रीट फूड वेंडर, लॉन्ड्री सेवाएं और यहां तक कि ऑटो रिक्शा चालक भी इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो हजारों छोटे और मध्यम प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं, जिससे लाखों लोगों की रोज़गार पर असर पड़ने की आशंका है। कई कारोबारियों ने मौजूदा हालात को कोविड-19 लॉकडाउन जैसी स्थिति बताया है।

चेन्नई और तमिलनाडु में रेस्टोरेंट उद्योग में अफरा-तफरी

तमिलनाडु में कमर्शियल LPG की अनियमित और लगभग ठप हो चुकी सप्लाई से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में हड़कंप मच गया है। कई रेस्टोरेंट ने अपने मेन्यू में आइटम कम कर दिए हैं और कुछ जगहों पर “नो वैरायटी राइस” जैसे बोर्ड लगाए गए हैं। चेन्नई होटल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कमर्शियल गैस को आवश्यक वस्तु घोषित करने और इसकी निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि अगर अगले दो-तीन दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो बड़े पैमाने पर रेस्टोरेंट बंद करने की नौबत आ सकती है।

मुंबई में 20% रेस्टोरेंट बंद, महालक्ष्मी धोबीघाट पर गहरा असर

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इस संकट का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। होटल-रेस्टोरेंट एसोसिएशन AHAR के अनुसार शहर के लगभग 20 प्रतिशत ईटरीज पहले ही बंद हो चुके हैं, जबकि हालात नहीं सुधरे तो आधे तक बंद होने की आशंका है। मुंबई का मशहूर महालक्ष्मी धोबीघाट, जो 136 साल पुराना और दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-एयर लॉन्ड्रोमैट माना जाता है, वहां भी गैस की कमी से काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां रोजाना एक लाख से अधिक कपड़े धुलते हैं, लेकिन एलपीजी की कमी के कारण ड्रायर और बॉयलर पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे हैं, जिससे कपड़े सुखाने में तीन से चार दिन की देरी हो रही है। कई मजदूरों को ब्लैक मार्केट में महंगे दाम पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं।

बेंगलुरु में होटल बंदी शुरू, पुणे और अन्य शहरों में भी असर

बेंगलुरु में ब्रुहत बेंगलुरु होटल ओनर्स एसोसिएशन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि गैस संकट के कारण होटल उद्योग पर बड़ा असर पड़ेगा। कई रेस्टोरेंट सीमित मेन्यू के साथ काम कर रहे हैं, जबकि कुछ ने आंशिक रूप से संचालन बंद कर दिया है। पुणे, कोलकाता और गुरुग्राम से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। बेंगलुरु में घरेलू गैस बुकिंग में अचानक उछाल देखा गया है, क्योंकि लोग संभावित कमी के डर से पहले ही सिलेंडर बुक करा रहे हैं।

वैश्विक हालात और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बना कारण

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट की एक बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। ईरान-इजरायल संघर्ष और उससे जुड़ी सैन्य गतिविधियों के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजरानी प्रभावित हुई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 62-65 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से करीब 85-90 प्रतिशत मिडिल ईस्ट के देशों—जैसे सऊदी अरब, कतर और ईरान—से आता है। इस समुद्री मार्ग से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए वहां किसी भी व्यवधान का असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर तुरंत दिखाई देता है। भारत अब अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे नए स्रोतों से आयात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

सरकार के कदम: घरेलू उपयोग को प्राथमिकता

पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति को देखते हुए रिफाइनरियों को अधिकतम क्षमता पर LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। प्रोपेन-ब्यूटेन स्ट्रीम्स को पेट्रोकेमिकल उत्पादन से हटाकर LPG में डायवर्ट किया जा रहा है। सरकार ने घरेलू गैस उपभोक्ताओं—जो कि देश में 33 करोड़ से अधिक हैं—और अस्पतालों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। कमर्शियल गैस की सप्लाई सीमित की गई है और घरेलू सिलेंडर की कीमत में लगभग ₹60 तथा कमर्शियल सिलेंडर में ₹115 की बढ़ोतरी की गई है। बुकिंग गैप को 15 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन किया गया है ताकि जमाखोरी रोकी जा सके। इंडियन ऑयल, भारत गैस और HPCL के अधिकारियों की एक समिति कमर्शियल मांग की समीक्षा कर रही है।

कारोबारियों की चेतावनी—कोविड जैसी आर्थिक मार

फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया (FHRAI) सहित कई व्यापारिक संगठनों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि छोटे होटल, ढाबे, स्ट्रीट वेंडर और मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक ईंधन जैसे PNG या बिजली की सुविधा नहीं होती। अगर यह संकट लंबा चला तो लाखों लोगों की रोज़गार पर खतरा मंडरा सकता है और स्थिति कोविड-19 लॉकडाउन के समय जैसी आर्थिक मार की ओर बढ़ सकती है।

देश के कई शहरों में LPG संकट ने व्यापार और आम जनजीवन दोनों को चिंता में डाल दिया है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि वैश्विक हालात कब सामान्य होते हैं और सरकार इस संकट से निपटने के लिए कितनी जल्दी स्थायी समाधान निकाल पाती है।

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