साजिद अली | कोलकाता 5 जनवरी 2026
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर आक्रामक तेवर दिखाते हुए बड़ा एलान किया है। उन्होंने साफ कहा है कि राज्य में हुई हिंसा के पीड़ितों के लिए वह खुद सुप्रीम कोर्ट में जाकर पैरवी करेंगी। ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में अगर किसी भी गरीब, कमजोर या अल्पसंख्यक के साथ अन्याय हुआ है, तो उसकी लड़ाई वह सड़क से लेकर अदालत तक लड़ेंगी। उनके मुताबिक यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि इंसाफ और इंसानियत की लड़ाई है, जिसे वह किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटने देंगी। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनाव आयोग के एक अधिकारी का नाम लेते हुए तीखे शब्दों में कहा कि “मिस्टर वैनिश कुमार, दुर्योधन और दुशासन—हम तुम्हें दिखाएंगे।” ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय विपक्षी ताकतों के इशारे पर काम कर रहा है। उनका कहना था कि बंगाल को बदनाम करने और डर का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जनता अब सब समझ चुकी है।
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें वक्फ की जमीनों पर नजर गड़ाए बैठी हैं और कानून के नाम पर उन्हें छीनने की कोशिश कर रही हैं। ममता बनर्जी ने भरोसा दिलाया कि जब तक वह मुख्यमंत्री हैं, तब तक बंगाल में वक्फ संपत्तियों के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और जरूरत पड़ी तो इसके लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
ममता बनर्जी ने डिटेंशन कैंप के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बंगाल में किसी भी हाल में डिटेंशन कैंप स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उनका कहना था कि यह राज्य इंसानों को डराने और कैद करने की सोच को नहीं मानता। बंगाल की मिट्टी भाईचारे, इंसाफ और लोकतंत्र की है, और यहां लोगों को उनके हक से वंचित नहीं किया जा सकता।
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने भावनात्मक अंदाज में कहा कि वह कुर्सी के लिए नहीं, बल्कि लोगों के सम्मान और सुरक्षा के लिए लड़ रही हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति और गरमा गई है और साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में चुनाव आयोग, बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव और तेज़ होने वाला है।




