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G20 में मोदी का वैश्विक मंत्र: अखंड मानवतावाद के साथ स्वास्थ्य, कौशल और ड्रग-आतंक पर तीन बड़े प्रहार

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अजित साही  | जोहान्सबर्ग 23 नवंबर 2025

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता, जलवायु संकट और स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी में शुरू हुए जी20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में एक व्यापक और दूरदर्शी विकास दृष्टि प्रस्तुत की। नासरेक एक्सपो सेंटर में हुए उद्घाटन सत्र में पीएम मोदी ने न सिर्फ पारंपरिक विकास मापदंडों पर गंभीर पुनर्विचार की आवश्यकता पर जोर दिया, बल्कि भारत की सभ्यतागत सोच—विशेष रूप से ‘अखंड मानवतावाद’ (इंटीग्रल ह्यूमनिज़्म)—को वैश्विक प्रगति का आधार बनाने का प्रस्ताव रखकर विश्व समुदाय को एक वैचारिक दिशा भी दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दुनिया को अब केवल आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों से आगे बढ़कर मानव कल्याण, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन पर आधारित विकास मॉडल अपनाने की जरूरत है। भारत के लिए यह अवसर केवल नेतृत्व का नहीं बल्कि वैश्विक मूल्य-विस्तार का है, और भारत की सभ्यतागत विरासत दुनिया को संतुलित, समावेशी और मानवीय विकास का रास्ता दिखा सकती है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में तीन महत्वपूर्ण वैश्विक पहलों का प्रस्ताव रखा, जिनमें पहला था—जी20 इनिशिएटिव ऑन काउंटरिंग द ड्रग-टेरर नेक्सस। उन्होंने चेतावनी दी कि फेंटेनिल जैसे अत्यंत खतरनाक नशीले पदार्थों का प्रसार न केवल स्वास्थ्य के लिए बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है, क्योंकि ड्रग तस्करी और आतंकवाद एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं और यह काले धन का नेटवर्क पूरी दुनिया को अस्थिर कर रहा है। उन्होंने जी20 देशों से अपील की कि वे इस दुष्चक्र को तोड़ने के लिए समन्वित कार्रवाई करें और ड्रग-आतंक अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए साझा रणनीति बनाएं। यह पहल भारत की लंबे समय से चली आ रही उस चिंता को प्रतिबिंबित करती है जिसमें नशीले पदार्थों की तस्करी का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को आर्थिक समर्थन देने के लिए किया जाता है।

दूसरा बड़ा प्रस्ताव अफ्रीका के विकास को केंद्र में रखते हुए जी20-अफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर इनिशिएटिव का था। पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक प्रगति तभी संभव है जब अफ्रीका विकास के पथ पर मज़बूती से आगे बढ़े, क्योंकि दुनिया की युवा आबादी का बड़ा हिस्सा इसी महाद्वीप में है। उन्होंने अगले दशक में अफ्रीका में 10 लाख प्रमाणित प्रशिक्षकों के निर्माण का लक्ष्य रखने का सुझाव दिया, जिससे न केवल अफ्रीकी युवाओं को रोजगार और कौशल प्राप्त होगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा भी मिलेगी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता मिलना ऐतिहासिक कदम था, जो भारत-अफ्रीका साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है।

तीसरी पहल स्वास्थ्य क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करने से संबंधित थी, जिसके तहत पीएम मोदी ने जी20 ग्लोबल हेल्थकेयर रिस्पॉन्स टीम बनाने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना था कि कोविड-19 महामारी ने दुनिया को सिखाया है कि स्वास्थ्य संकट के समय अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कमी कितनी विनाशकारी साबित हो सकती है। प्रस्तावित स्वास्थ्य प्रतिक्रिया टीम में जी20 देशों के प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल होंगे, जिन्हें किसी भी वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में तुरंत तैनात किया जा सकेगा। उनका मानना है कि यह ढांचा भविष्य में मानवता को आने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने की क्षमता देगा।

अपने भाषण में पीएम मोदी ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया—जी20 के तहत एक वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार (ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपॉजिटरी) की स्थापना। उन्होंने कहा कि दुनिया भर की पारंपरिक जीवन-शैली, स्वास्थ्य पद्धतियाँ, पर्यावरण-संतुलन के सिद्धांत और सामाजिक सामंजस्य के मॉडल मानवता की साझा धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित करने और वैज्ञानिक रूप से समझने की जरूरत है। यह भंडार न केवल सांस्कृतिक विविधता को सुरक्षित रखेगा बल्कि सतत विकास और बेहतर स्वास्थ्य प्रणालियों को बढ़ावा देने में भी मदद करेगा। पीएम मोदी ने इसे अखंड मानवतावाद के विचार से जोड़ते हुए कहा कि सामूहिक बुद्धिमत्ता और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने से ही दुनिया में संतुलित विकास संभव है।

कुल मिलाकर, जी20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारत ने न केवल नीति सुझावों के रूप में ठोस प्रस्ताव दिए, बल्कि एक वैचारिक नेतृत्व भी प्रदर्शित किया, जिसमें ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सभी दिशाओं में विकास’ की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। वैश्विक मंच पर भारत की यह सक्रिय और दूरदर्शी भूमिका न केवल विकासशील देशों के हितों को आवाज देती है, बल्कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की दिशा में ठोस कदम भी प्रस्तुत करती है। विश्लेषकों का मानना है कि ये पहलें यदि सफलतापूर्वक लागू होती हैं, तो जी20 एक केवल आर्थिक मंच न रहकर वैश्विक मानव कल्याण की दिशा में वास्तविक परिवर्तनकारी संस्था साबित हो सकता है।

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