नई दिल्ली/ मुंबई 6 अक्टूबर 2025
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने “परम मित्र” गौतम अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए पर्यावरण मंत्रालय के नियमों में सीधा संशोधन करा दिया है। पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार अब “अडानी प्रोटेक्शन एक्ट” के तहत काम कर रही है, जिसमें न जनता की आवाज़ सुनी जाती है और न ही पर्यावरणीय सुरक्षा की परवाह की जाती है। कांग्रेस ने कहा कि यह सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारियों और जनता के विश्वास का भी खुला उल्लंघन है।
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने खुलासा किया कि अडानी समूह मुंबई महानगर क्षेत्र के कल्याण इलाके में एक विशाल सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट स्थापित करने जा रहा है, जिसकी लागत सैकड़ों करोड़ रुपये है। यह प्रोजेक्ट समूह की Ambuja Cements Limited और ACC Limited के तहत विकसित किया जा रहा है। लेकिन इसी बीच मोदी सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने एक ऐसा नोटिफिकेशन जारी किया है जिसने पूरे देश के पर्यावरणविदों को चौंका दिया है। नए नियम के मुताबिक अब “किसी भी स्टैंडअलोन सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट” को पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance – EC) लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
इसका सीधा मतलब यह है कि अब ऐसी फैक्ट्रियां बिना किसी जनसुनवाई के शुरू हो जाएंगी। पहले तक किसी भी औद्योगिक प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (EIA Report) तैयार करना और स्थानीय लोगों की राय लेना अनिवार्य था। लेकिन मोदी सरकार के इस नए फैसले ने यह प्रक्रिया ही समाप्त कर दी। अब यह नहीं देखा जाएगा कि फैक्ट्री से निकलने वाला धूल और कार्बन प्रदूषण आसपास की हवा, पानी और मिट्टी को कितना प्रभावित करेगा। न यह पता चलेगा कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर इसका कितना बुरा असर पड़ेगा। न कोई रिपोर्ट, न कोई जनसुनवाई — सीधे अडानी को फायदा।
कांग्रेस ने कहा कि अडानी का यह सीमेंट प्लांट जिस इलाके में बनाया जा रहा है, वह घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां पहले से ही ट्रैफिक और वायु प्रदूषण गंभीर समस्या हैं। फैक्ट्री शुरू होने के बाद वहां के नागरिकों को सांस संबंधी बीमारियों, फेफड़ों के संक्रमण और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। स्थानीय निवासियों ने इस परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि सरकार ने जनता की राय जाने बिना, रातोंरात कानून में बदलाव कर दिया, ताकि अडानी ग्रुप को कोई अड़चन न झेलनी पड़े।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने भी इस कदम की निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि यह एक खतरनाक मिसाल साबित होगी। पर्यावरणविद् डॉ. सुरेश राव ने कहा कि सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट्स से बड़ी मात्रा में डस्ट पार्टिकल्स और कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य फेफड़ों की बीमारियां फैलती हैं। उन्होंने कहा कि “अगर इस तरह की यूनिट्स को बिना पर्यावरणीय जांच की मंजूरी दी जाने लगी, तो यह पूरे औद्योगिक सेक्टर को ‘नियमविहीन प्रदूषण मुक्त क्षेत्र’ में बदल देगा।”
कांग्रेस ने मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह फैसला जनता के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ एक उद्योगपति के लिए लिया गया है। पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “जब भी अडानी को कोई दिक्कत होती है, सरकार तुरंत कोई नियम बदल देती है। एयरपोर्ट हो, बंदरगाह हो, बिजली हो या अब सीमेंट — हर सेक्टर में मोदी सरकार ने अपने दोस्त को फायदा पहुंचाने के लिए नीतियां मोड़ दी हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यह सिर्फ पूंजीवाद नहीं, बल्कि “भाई-भतीजावादी पूंजीवाद” है, जहां सत्ता और व्यवसाय का गठजोड़ जनता के अधिकारों को कुचल रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार का यह रवैया दिखाता है कि उसे अब देश के संविधान, जनता के स्वास्थ्य या पर्यावरण की कोई चिंता नहीं रह गई है। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा — “प्रधानमंत्री मोदी को न जनता की चिंता है, न प्रदूषण की, न पर्यावरण की। उन्हें सिर्फ अपने परम मित्र अडानी की परवाह है। सरकार अब देश नहीं, एक उद्योगपति के साम्राज्य की सेवा में लगी है।”
कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग करते हुए कहा है कि पर्यावरण मंत्रालय का यह कदम जनता और प्रकृति दोनों के साथ अन्याय है। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पर जवाब देना चाहिए कि आखिर सरकार ने बिना किसी सार्वजनिक विमर्श के इतना बड़ा बदलाव क्यों किया। यह सवाल अब सिर्फ विपक्ष का नहीं, बल्कि हर उस नागरिक का है जो स्वच्छ हवा में सांस लेना चाहता है — क्योंकि जनता के स्वास्थ्य से बड़ा कोई “परम मित्र” नहीं हो सकता।




