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मेसी ने कहा अलविदा: “अब कुछ देने को नहीं बचा”, अर्जेंटीना के लिए 21 साल का जादुई सफर आंसुओं के साथ खत्म

खेल | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 सितंबर 2026

फुटबॉल की दुनिया जिस पल को देखने से हमेशा बचना चाहती थी, वह आखिरकार आ गया। अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास का ऐलान कर दिया है। 39 साल की उम्र में मेसी ने कहा कि उन्होंने अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम को अपना सब कुछ दे दिया और अब उनके पास देने के लिए “कुछ नहीं बचा”। जिस खिलाड़ी ने वर्षों तक अर्जेंटीना के करोड़ों प्रशंसकों की उम्मीदों को अपने पैरों में संभाले रखा, जिसने हार के बाद आलोचनाओं का तूफान झेला और फिर उसी टीम को विश्व चैंपियन बनाया, उसके लिए यह फैसला आसान नहीं था। मेसी ने खुद स्वीकार किया कि यह निर्णय उन्हें “गहराई से चोट” पहुंचाता है। उनके शब्दों में दर्द भी है, संतोष भी और उस लंबे सफर को छोड़ने की मजबूरी भी, जिसने उन्हें फुटबॉल के इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।

मेसी ने अपने भावुक संदेश में कहा कि समय तेजी से निकल रहा है, अध्याय खत्म होते हैं और अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के साथ उनका अध्याय भी अब समाप्त होने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि वह अर्जेंटीना के लिए खेलना प्यार करते थे, आज भी करते हैं और हमेशा करते रहेंगे। लेकिन अब उन्हें लगता है कि उन्होंने अपना सब कुछ दे दिया है और उनके पीछे कई शानदार युवा खिलाड़ी तैयार हैं, जिन्हें अब अपनी जगह बनाने का मौका मिलना चाहिए। यह सिर्फ एक खिलाड़ी का संन्यास नहीं है; यह उस युग का अंत है जिसमें मेसी का नाम अर्जेंटीना की उम्मीद, निराशा, संघर्ष और अंततः गौरव—चारों से जुड़ा रहा।

मेसी का अंतरराष्ट्रीय करियर 2005 में शुरू हुआ था और शुरुआत ऐसी हुई थी जिसे शायद कोई पटकथा लेखक भी नहीं लिखता। हंगरी के खिलाफ दोस्ताना मुकाबले में वह 63वें मिनट में मैदान पर उतरे, लेकिन एक मिनट से भी कम समय बाद उन्हें सीधे लाल कार्ड का सामना करना पड़ा। उस समय शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि यह दुबला-पतला युवा खिलाड़ी आगे चलकर अर्जेंटीना का सबसे बड़ा सितारा, सर्वाधिक गोल करने वाला खिलाड़ी और सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाला फुटबॉलर बनेगा। लेकिन अगले दो दशकों ने दुनिया को दिखाया कि असाधारण प्रतिभा किसे कहते हैं।

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आज मेसी अर्जेंटीना के लिए 207 मैचों में 125 गोल कर चुके हैं और दोनों ही आंकड़ों में देश के सर्वकालिक रिकॉर्डधारी हैं। विश्व कप में उनके नाम 21 गोल हैं, जो उन्हें इस प्रतियोगिता के इतिहास में दूसरे स्थान पर रखते हैं। उनसे आगे फ्रांस के किलियन एमबाप्पे हैं। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में भी मेसी 125 गोल के साथ दूसरे स्थान पर हैं और उनसे आगे उनके लंबे समय के प्रतिद्वंद्वी क्रिस्टियानो रोनाल्डो हैं, जिनके नाम 146 गोल हैं। लेकिन मेसी की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह उस खिलाड़ी की कहानी है जिसने अपने देश के लिए खेलने का सपना देखा, उस सपने को पाने के लिए आलोचनाओं का सामना किया और आखिरकार वह सब हासिल किया जिसके लिए वह वर्षों तक तरसता रहा।

मेसी के करियर का सबसे चमकदार अध्याय 2022 में लिखा गया, जब अर्जेंटीना ने कतर में विश्व कप जीता। वह ट्रॉफी मेसी के लिए केवल एक खिताब नहीं थी; वह उनके करियर की सबसे बड़ी अधूरी इच्छा का पूरा होना था। वर्षों तक उनकी तुलना महानतम खिलाड़ियों से होती रही, लेकिन आलोचकों के पास हमेशा एक सवाल बचा रहता था—क्या मेसी अपने देश के लिए विश्व कप जीत सकते हैं? कतर में उन्होंने उस सवाल का ऐसा जवाब दिया जिसे फुटबॉल इतिहास कभी नहीं भूल पाएगा। विश्व कप ट्रॉफी हाथ में लेकर खड़े मेसी की तस्वीर उनके पूरे करियर का प्रतीक बन गई।

इसके बाद उन्होंने अर्जेंटीना के साथ दो कोपा अमेरिका खिताब भी जीते और राष्ट्रीय टीम के लिए वह सब हासिल किया जिसकी कभी उनसे उम्मीद की जाती थी। लेकिन इस सफर में सिर्फ जीत नहीं थी। हार भी थी, आंसू भी थे और कई बार संन्यास लेने का फैसला भी। 2016 में कोपा अमेरिका फाइनल में चिली से हार और पेनल्टी शूटआउट में खुद पेनल्टी चूकने के बाद मेसी ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा की थी। लेकिन वह फैसला स्थायी नहीं रहा। वह वापस लौटे और फिर वही खिलाड़ी बने जिसने अर्जेंटीना को इतिहास की सबसे बड़ी ट्रॉफियों में से एक दिलाई।

इस बार कहानी कुछ अलग है। 2026 विश्व कप के फाइनल में अर्जेंटीना की स्पेन से हार के बाद मेसी ने अपने भविष्य को लेकर विचार करना शुरू किया। वह मुकाबला स्कोरलाइन में भले ही बेहद करीबी रहा, लेकिन मेसी के लिए यह भावनात्मक रूप से बहुत भारी था। उन्होंने बाद में बताया कि उन्होंने अपना संन्यास संदेश 21 जुलाई को ही लिख दिया था—विश्व कप फाइनल में हार के दो दिन बाद। इसके बाद उनके पिता जॉर्ज मेसी की मृत्यु ने इस फैसले को और गहरा कर दिया। उनके पिता का अगस्त में 68 वर्ष की उम्र में लंबे समय तक बीमारी से जूझने के बाद निधन हुआ। मेसी ने कहा कि पिता की मृत्यु के बाद वह पहले से भी ज्यादा आश्वस्त हो गए कि अब समय आ गया है।

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2026 विश्व कप भी मेसी के लिए किसी विदाई समारोह से कम नहीं रहा। उन्होंने टूर्नामेंट में 8 गोल और 4 असिस्ट किए। विश्व कप में उनके कुल असिस्ट की संख्या 12 हो गई है, जिनमें से 10 नॉकआउट दौर में आए हैं। इस मामले में विश्व कप के रिकॉर्ड में कोई दूसरा खिलाड़ी उनके आंकड़े के करीब नहीं है। लेकिन फाइनल की हार के बाद मैदान पर बैठे मेसी की आंखों में जो निराशा दिखाई दी, उसने दुनिया को शायद उस कहानी का आखिरी दृश्य पहले ही दिखा दिया था। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने अपने करियर में लगभग सब कुछ जीत लिया, फिर भी अपने देश के लिए आखिरी बार विश्व कप उठाने का सपना पूरा नहीं कर सका।

मेसी ने अर्जेंटीना के प्रशंसकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों में उन्हें जो प्यार मिला, उसे वह कभी नहीं भूलेंगे। उन्होंने कहा कि मैदान से प्रशंसकों की आवाज सुनना उन्हें बहुत याद आएगा और अब वह मैदान के बाहर से उन्हीं प्रशंसकों की तरह अर्जेंटीना को समर्थन देंगे। यह वाक्य शायद उनके संन्यास की पूरी भावना को सबसे अच्छी तरह समझाता है—अब वह अर्जेंटीना के लिए मैदान पर दौड़ते हुए नहीं दिखेंगे, लेकिन उस नीली-सफेद जर्सी के लिए उनका प्यार वहीं रहेगा।

मेसी की कहानी इसलिए भी असाधारण है क्योंकि वह केवल प्रतिभा की कहानी नहीं है। यह समय से लड़ने की कहानी है। उम्र बढ़ती रही, शरीर ने पहले जैसी तेजी से जवाब देना कम किया, लेकिन गेंद उनके पैरों में आते ही जादू अब भी दिखाई देता रहा। 39 की उम्र में भी उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट में आठ गोल करके दिखाया कि महानता उम्र की मोहताज नहीं होती। लेकिन आखिरकार समय हर खिलाड़ी को रोकता है। मेसी के मामले में भी यही हुआ।

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अर्जेंटीना के लिए अब एक बड़ा सवाल यह है कि मेसी के बाद टीम का चेहरा कौन होगा। उनके पीछे युवा खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार है और मेसी खुद मानते हैं कि उन्हें मौका मिलना चाहिए। लेकिन यह खाली जगह भरना आसान नहीं होगा। अर्जेंटीना ने मेसी से पहले भी महान खिलाड़ी देखे हैं और भविष्य में भी सितारे आएंगे, लेकिन मेसी जैसा खिलाड़ी सिर्फ एक टीम का कप्तान नहीं होता—वह एक युग की पहचान बन जाता है।

क्लब फुटबॉल में मेसी का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। वह इंटर मियामी के साथ खेलते रहेंगे और उनका अनुबंध 2028 सीजन के अंत तक है। यानी फुटबॉल प्रेमियों को मैदान पर मेसी की झलक अभी मिलती रहेगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब वह अर्जेंटीना की जर्सी में नहीं, क्लब की जर्सी में नजर आएंगे।

फुटबॉल में कई महान खिलाड़ी आए, रिकॉर्ड बनाए और चले गए। लेकिन मेसी ने इस खेल को केवल आंकड़ों से नहीं, भावनाओं से भी समृद्ध किया। उनके गोल पर दुनिया झूमी, उनकी हार पर लाखों लोग रोए, उनकी ड्रिब्लिंग ने विरोधी टीमों की पूरी रणनीति बिगाड़ दी और उनके बाएं पैर ने ऐसे क्षण रचे जिन्हें आने वाली पीढ़ियां वीडियो में देखकर सीखेंगी। उन्होंने अर्जेंटीना को निराशा से उम्मीद, उम्मीद से जीत और जीत से अमरता तक पहुंचाया।

और अब जब मेसी कह रहे हैं—“मैंने अपना सब कुछ दे दिया, मेरे पास अब देने के लिए कुछ नहीं बचा”, तो शायद दुनिया को भी स्वीकार करना होगा कि हर महान कहानी का एक आखिरी पन्ना होता है।

अर्जेंटीना के लिए मेसी का आखिरी अध्याय आंसुओं में बंद हुआ है, लेकिन उनकी कहानी खत्म नहीं हुई। क्योंकि कुछ खिलाड़ी संन्यास लेते हैं, मगर कुछ खिलाड़ी इतिहास बन जाते हैं। लियोनेल मेसी अब उसी इतिहास का हिस्सा हैं।

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