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मदीना बस हादसा: भारतीयों को सऊदी में सुपुर्दे-ख़ाक, ग़म और दुआओं के बीच अंतिम विदाई”

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क 23 नवंबर 2025

सऊदी अरब के मदीना में हुए दर्दनाक बस हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय यात्रियों को शनिवार, 22 नवंबर की दोपहर मदीना में पूरी इस्लामी परंपराओं के साथ सुपुर्दे-ख़ाक किया गया। जनाज़े और दफ़न की रस्में बेहद गमगीन माहौल में अदा की गईं, जहाँ बड़ी संख्या में परिजनों, भारतीय समुदाय के लोगों और अधिकारियों ने पहुंचकर अपने प्रियजनों को आखिरी अलविदा कहा। नम आँखों, दुआओं और सन्नाटे के बीच यह विदाई हर किसी के दिल को छू गई।

इस मौके पर भारत और सऊदी अरब के कई अहम अधिकारी मौजूद रहे। आंध्र प्रदेश के गवर्नर जस्टिस एस. अब्दुल नज़ीर ने मस्जिद-ए-नबवी में जनाज़े की नमाज़ में हिस्सा लिया और इसके बाद मशहूर व मुकद्दस जन्नतुल बक़ी कब्रिस्तान में दफ़न प्रक्रिया के दौरान भी मौजूद रहे। उनके साथ तेलंगाना के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अजहरुद्दीन, सऊदी अरब में भारत के राजदूत डॉ. सुहेल खान और जेद्दाह के कॉन्सुल जनरल फहद सूरी भी खड़े नज़र आए। अधिकारियों ने परिजनों के साथ मिलकर दुख का इज़हार किया और भरोसा दिलाया कि भारत सरकार इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ है। सऊदी विदेश मंत्रालय और मदीना गवर्नरेट के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने यह दिखाया कि स्थानीय प्रशासन ने भी पूरी संवेदनशीलता के साथ सहयोग किया।

भारत सरकार और भारतीय दूतावास ने हादसे के बाद सभी जरूरी औपचारिकताएं तेजी से पूरी कराईं, ताकि अंतिम रस्मों में कोई रुकावट न आए। भारतीय दूतावास ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी हमदर्दी जाहिर करते हुए कहा कि यह हादसा बेहद तकलीफ़देह है और कई परिवारों के लिए अपूरणीय सदमा लेकर आया है। दूतावास ने सुनिश्चित किया कि जनाज़ा, दफ़्न और दस्तावेजी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हों और मृतकों को इज़्ज़त और सम्मान के साथ सुपुर्दे-ख़ाक किया जाए।

हादसे ने एक बार फिर विदेशी यात्रा और ज़ियारत के दौरान सुरक्षा इंतज़ामात पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि सऊदी प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राहत और सहायता मुहैया कराई, लेकिन इस दर्दनाक घटना ने लोगों के दिलों में गहरी चोट छोड़ दी है। कई परिजन जन्नतुल बक़ी में दुआ करते दिखाई दिए कि अल्लाह अपने बंदों को जन्नत में आला मुकाम अता करे और उनके परिवारों को सब्र दे।

यह हादसा दोनों देशों के बीच मानवीय रिश्तों और एकजुटता की मिसाल भी बन गया, जहाँ प्रशासन, समुदाय और परिवार एक साथ खड़े नज़र आए। दुख और मातम के इस माहौल में एक ही आवाज़ गूंजती रही—”अल्लाह उन सब की मग़फ़िरत फरमाए और उनके घरवालों को हिम्मत दे।”

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