माले, 2 नवंबर 2025
हिंद महासागर के खूबसूरत द्वीप राष्ट्र मालदीव ने आज इतिहास रच दिया। देश में ‘जनरेशन बैन ऑन स्मोकिंग’ नीति आधिकारिक रूप से लागू हो गई है — जिसके तहत 1 जनवरी 2007 या उसके बाद जन्मे किसी भी व्यक्ति को अब जीवनभर तंबाकू या सिगरेट खरीदने, पीने या रखने की अनुमति नहीं होगी। इस कानून को मालदीव ने “स्वस्थ पीढ़ी, स्वस्थ राष्ट्र” के अभियान के तहत लागू किया है, और इसके साथ ही वह दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने धूम्रपान के खिलाफ पीढ़ीगत प्रतिबंध लगाया है।
राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने इस कानून को “भविष्य की पीढ़ी को लत और बीमारी से बचाने का कदम” बताया। उनका कहना है कि यह केवल एक प्रतिबंध नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुधार आंदोलन है जो आने वाले वर्षों में मालदीव को “तंबाकू-मुक्त राष्ट्र” बनाएगा। राष्ट्रपति कार्यालय के बयान में कहा गया — “अब से मालदीव की नई पीढ़ी धुएं से नहीं, समुद्र की ताज़गी से सांस लेगी।”
इस नए कानून के तहत 2007 के बाद जन्मे नागरिकों को किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पाद खरीदने या इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध रहेगा। इसमें सिगरेट, सिगार, तंबाकू, हुक्का, ई-सिगरेट और वपिंग उपकरण शामिल हैं। किसी भी दुकान, होटल या व्यक्ति द्वारा इन लोगों को तंबाकू उत्पाद बेचना गंभीर अपराध माना जाएगा। उल्लंघन करने वालों पर 50,000 मालदीवियन रुफिया (लगभग ₹2.7 लाख) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
मालदीव में तंबाकू-उपभोग दर काफी ऊंची रही है, खासकर युवा वर्ग में। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 35 प्रतिशत पुरुष और 10 प्रतिशत महिलाएं नियमित रूप से धूम्रपान करती हैं। यह दर दक्षिण एशिया के औसत से भी अधिक है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, हर साल सैकड़ों मौतें तंबाकू-संबंधी बीमारियों जैसे कैंसर, फेफड़ों की बीमारी और हृदय रोग के कारण होती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कानून न सिर्फ एक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार है, बल्कि यह आने वाले दशकों में सामाजिक आदतों को बदलने वाला कदम साबित हो सकता है। हालांकि कुछ व्यापारिक समूहों और पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने चिंता जताई है कि इस नीति से विदेशी सैलानियों पर असर पड़ सकता है। लेकिन सरकार का तर्क है कि “तंबाकू-मुक्त मालदीव” स्वयं में एक पर्यावरणीय और स्वास्थ्य ब्रांड बनेगा, जो देश की वैश्विक छवि को और मजबूत करेगा।
मालदीव सरकार ने इस अभियान के साथ जागरूकता कार्यक्रम, स्कूल-स्तरीय शिक्षा अभियान, और धूम्रपान छोड़ने के लिए विशेष सहायता केंद्र शुरू किए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का लक्ष्य है कि वर्ष 2035 तक तंबाकू उपभोग को 5 प्रतिशत से नीचे लाया जाए।
दुनिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मालदीव की इस पहल की सराहना की है। इसे न्यूज़ीलैंड की “जनरेशन स्मोक-फ्री” नीति की तर्ज पर एक साहसिक कदम बताया जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो अन्य देशों के लिए यह प्रेरणा बन सकता है कि कैसे एक राष्ट्र अपनी नई पीढ़ी को नशे और बीमारी से दूर रख सकता है।
मालदीव ने यह संदेश दिया है कि “तंबाकू पर प्रतिबंध सिर्फ नीति नहीं — आने वाले भविष्य की सुरक्षा है।”
आज से वहाँ की नई पीढ़ी के लिए सिगरेट अतीत की बात बन गई है।





