एबीसी डेस्क। 2 दिसंबर 2025
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के भीतर एक बड़े फेरबदल ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार देर रात जारी एक आंतरिक मेमो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे पुराने और भरोसेमंद मीडिया रणनीतिकार माने जाने वाले हिरन जोशी की सभी ज़िम्मेदारियाँ तत्काल प्रभाव से छीन ली गई हैं और उनका पूरा प्रभारी कार्यभार केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंप दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह व्यवस्था “अस्थायी” है, जब तक कि एक गुजरात कैडर का अधिकारी आधिकारिक रूप से इस ज़िम्मेदारी को संभाल नहीं लेता। इस अचानक हुए बदलाव ने संकेत दे दिया है कि PMO और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच अंदरखाने गंभीर उथल-पुथल चल रही है।
सूत्रों के अनुसार, हिरन जोशी न केवल प्रधानमंत्री के मीडिया रणनीति विंग का अभिन्न हिस्सा थे बल्कि गुजरात के मुख्यमंत्री काल से ही नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों से लगातार कई विवादों और संवेदनशील आरोपों ने उन्हें घेरे रखा था — जिन आरोपों को पार्टी के भीतर “अनकहे रहस्यों की मोटी फ़ाइल” बताया जा रहा है। आरोपों में सबसे पहले नाम आता है दुबई आधारित अवैध बेटिंग ऐप नेटवर्क से जुड़े रवि तिहरवाला कनेक्शन का, जिसकी जांचों ने PMO को असहज स्थिति में ला दिया था। इसके अलावा जोशी पर यह भी आरोप है कि उन्होंने सतनाम सिंह संधू से ₹30 करोड़ लेकर राज्यसभा टिकट डीलिंग में भूमिका निभाई — यह दावा खुद भाजपा और RSS के कई पुराने पदाधिकारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इसी सूची में एक और बड़ा विवाद जुड़ता है — जोशी के एक करीबी रिश्तेदार या पुत्र के बारे में यह चर्चा कि वह कथित तौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) में लगभग ₹3 करोड़ वार्षिक पैकेज पर कार्यरत हैं। यह तथ्य PMO के भीतर हितों के टकराव (Conflict of Interest) की बहस को हवा देता रहा। लेकिन सबसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से विस्फोटक आरोप है हिमानी सूद से जुड़े विवाद का, जो गुजरात और दिल्ली, दोनों सियासी गलियारों में लगातार फुसफुसाहट का विषय रहा है। आरोप है कि हiren जोशी हिमानी सूद को विदेश दौरों में उच्च-स्तरीय बैठकों तक ले जाते रहे, और यहाँ तक कि उन्हें हिमाचल प्रदेश से भाजपा टिकट दिलाने का प्रयास भी कर रहे थे। बताया जाता है कि सूद को प्रधानमंत्री के विदेश दौरों के दौरान असामान्य एक्सेस दिया गया, जिसने सुरक्षा और प्रोटोकॉल एजेंसियों तक को चौंका दिया था। इस लिस्ट में यह दावा भी शामिल है कि सूद को वेटिकन में पोप से मुलाकात जैसी उच्च-स्तरीय बैठकों तक पहुँच दिलाई गई — जिसने PMO की विश्वसनीयता और प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।
इन सभी विवादों के बीच PMO ने अचानक और कड़े कदम उठाते हुए जोशी की सभी जिम्मेदारियाँ हटाईं और तत्काल अश्विनी वैष्णव को हस्तांतरित कर दिया — यह संकेत है कि सरकार अब स्थिति को नियंत्रण से बाहर नहीं जाने देना चाहती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि शक्ति संतुलन का निर्णायक क्षण है, जो प्रधानमंत्री के सबसे पुराने मीडिया डिपार्टमेंट की कार्यशैली में बड़े बदलाव की ओर संकेत करता है। BJP के भीतर भी इस कदम को “क्लीन-अप एक्ट” के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब चुनावी साल में सरकार किसी भी तरह की छवि-हानि से बचना चाहती है।
इस घटनाक्रम ने भाजपा, नौकरशाही और मीडिया जगत में तेज़ बहस छेड़ दी है। क्या यह सिर्फ ‘नुकसान नियंत्रण’ है या क्या PMO में किसी और बड़ी पॉलिसी या व्यक्ति-केन्द्रित पुनर्गठन की तैयारी चल रही है? फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल गूँज रहा है—
“हिरन जोशी अचानक क्यों हटाए गए, और यह कहानी कहाँ तक जाएगी?”




