राष्ट्रीय/कानून | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026
2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े षड्यंत्र के मामले में कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से बुधवार को बड़ा झटका लगा। हाईकोर्ट ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों ने इस मामले में तीसरी बार जमानत के लिए अदालत का रुख किया था। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने दोनों की याचिकाओं को खारिज कर दिया।
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे कथित बड़े षड्यंत्र की जांच से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष ने मामले में कई लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश सहित विभिन्न आरोप लगाए हैं। उमर खालिद को इस मामले में 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से उनकी जमानत को लेकर अदालत में लंबी कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों की ओर से जमानत की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत की दो सदस्यीय पीठ ने उनकी तीसरी जमानत याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया और दोनों को राहत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल दोनों की न्यायिक हिरासत जारी रहेगी।
2020 के दिल्ली दंगे फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हुए थे। हिंसा में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे और जान-माल का नुकसान हुआ था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दंगों से जुड़े अलग-अलग मामलों की जांच शुरू की। बड़े षड्यंत्र से जुड़े मामले में पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाया और आरोप लगाया कि हिंसा के पीछे व्यापक स्तर पर साजिश रची गई थी। आरोपियों ने इन आरोपों को अदालत में चुनौती दी है।
उमर खालिद की गिरफ्तारी सितंबर 2020 में हुई थी। इसके बाद से उनकी जमानत का मामला दिल्ली की विभिन्न अदालतों में सुनवाई के अलग-अलग चरणों से गुजरता रहा है। वहीं शरजील इमाम भी इसी मामले में आरोपी हैं। दोनों की ओर से समय-समय पर अदालत में जमानत की मांग की गई, लेकिन बुधवार को हाईकोर्ट ने उनकी तीसरी जमानत याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले का अर्थ यह है कि मामले में आरोपों और साक्ष्यों को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। जमानत से इनकार को मामले में दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाता। दोनों आरोपी अभी भी कानून की नजर में तब तक दोषी नहीं माने जाते, जब तक अदालत मामले की सुनवाई के बाद आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं सुनाती।
2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में अदालतों में लंबे समय से सुनवाई और जमानत याचिकाओं पर बहस चलती रही है। इस मामले में भी अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच आरोपों, सबूतों और कथित साजिश की भूमिका को लेकर कानूनी दलीलें दी जाती रही हैं। बुधवार का आदेश इसी लंबी न्यायिक प्रक्रिया का एक नया चरण है।
दिल्ली हाईकोर्ट के बुधवार के फैसले के बाद उमर खालिद और शरजील इमाम को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। दोनों की कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रह सकती है और हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।



