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ममता बनर्जी को बागी टीएमसी गुट का बड़ा ऑफर! नंदीग्राम में उम्मीदवार हटाकर समर्थन देने की तैयारी

राजनीति/ पश्चिम बंगाल | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 13 सितंबर 2026

टीएमसी के बागी गुट ने बढ़ाया सियासी हाथ

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही लड़ाई अब नंदीग्राम तक पहुंच गई है। दिल्ली में बागी टीएमसी गुट के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय चुनाव संस्थान से जुड़े अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी ने किया। गुट का कहना है कि बैठक सकारात्मक रही और अधिकारियों ने जिन दस्तावेजों की मांग की है, उन्हें जल्द जमा कराया जाएगा।

नंदीग्राम में बदल सकता है पूरा चुनावी समीकरण

सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ नंदीग्राम को लेकर सामने आया है। बागी गुट ने संकेत दिया है कि अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरती हैं, तो वह अपना उम्मीदवार वापस लेकर उन्हें समर्थन देने पर विचार कर सकता है। गुट के अनुसार इस फैसले पर 16 सितंबर से पहले फैसला लिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो नंदीग्राम की लड़ाई अचानक बेहद दिलचस्प हो सकती है और मुकाबले का पूरा राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।

ममता को अपने चुनाव चिन्ह पर पूरा भरोसा

दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने टीएमसी के चुनाव चिन्ह को लेकर पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें “100 प्रतिशत” विश्वास है कि पार्टी का चुनाव चिन्ह उनके पक्ष में रहेगा। यानी एक तरफ बागी गुट चुनाव चिन्ह को लेकर अपना दावा मजबूत करने में जुटा है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी को भरोसा है कि पार्टी का आधिकारिक चिन्ह उनके साथ ही रहेगा।

असल लड़ाई सिर्फ चुनाव चिन्ह की नहीं

इस पूरे विवाद को केवल चुनाव चिन्ह की लड़ाई मानना आसान होगा, लेकिन इसके पीछे टीएमसी के भीतर राजनीतिक नियंत्रण का बड़ा सवाल भी जुड़ा है। अगर बागी गुट नंदीग्राम में अपना उम्मीदवार हटाकर ममता को समर्थन देता है, तो यह संकेत होगा कि दोनों पक्षों के बीच टकराव के बावजूद चुनावी रणनीति के स्तर पर बातचीत की गुंजाइश बनी हुई है। वहीं अगर उम्मीदवार वापस नहीं लिया जाता, तो नंदीग्राम में मुकाबला और अधिक रोचक हो सकता है।

16 सितंबर के फैसले पर टिकी नजरें

अब सबसे ज्यादा नजर 16 सितंबर से पहले होने वाले फैसले पर है। क्या बागी टीएमसी गुट वास्तव में अपना उम्मीदवार वापस लेगा? क्या ममता बनर्जी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगी? और सबसे बड़ा सवाल—अगर वह निर्दलीय लड़ती हैं तो क्या उन्हें टीएमसी के आधिकारिक चुनाव चिन्ह के बिना भी पार्टी के बड़े हिस्से का समर्थन मिल पाएगा?

नंदीग्राम फिर बना बंगाल की राजनीति का केंद्र

नंदीग्राम पहले भी पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा राजनीतिक मैदान रहा है। अब टीएमसी के अंदर चल रहे इस विवाद ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया है। एक तरफ ममता बनर्जी अपने चुनाव चिन्ह को लेकर आश्वस्त हैं, दूसरी तरफ बागी गुट दस्तावेजों के साथ अपना दावा आगे बढ़ा रहा है और अब समर्थन की पेशकश ने कहानी में नया मोड़ जोड़ दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल

अगर बागी गुट सचमुच अपना उम्मीदवार हटाकर ममता बनर्जी को समर्थन देता है, तो क्या यह टीएमसी के भीतर किसी नए राजनीतिक समझौते की शुरुआत होगी? या फिर यह सिर्फ नंदीग्राम के उपचुनाव तक सीमित रणनीति होगी? आने वाले कुछ दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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