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मतदाता सूची में बड़ी हेराफेरी, लोकतंत्र पर हमला, राजस्थान के लिए काला दिन— अशोक गहलोत

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एबीसी नेशनल न्यूज | 16 जनवरी 2026

राजस्थान की राजनीति में उस समय तीखा सियासी तूफान खड़ा हो गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी सरकार पर मतदाता सूचियों में सुनियोजित हेराफेरी का गंभीर आरोप लगाया। गहलोत ने कहा कि आज का दिन राजस्थान के लोकतांत्रिक इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज होगा। उनके अनुसार, सत्ता के नशे में चूर बीजेपी ने लोकतंत्र की बुनियाद पर प्रहार करते हुए अपना असली चेहरा जनता के सामने उजागर कर दिया है।

अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची सुधार (SIR) प्रक्रिया के अंतिम दिन प्रशासन का दुरुपयोग करते हुए एक सोची-समझी साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) के माध्यम से बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर दबाव डाला गया कि वे कांग्रेस विचारधारा से जुड़े मतदाताओं के नाम सूची से हटाएं। इतना ही नहीं, कई जगहों पर फॉर्म-7 पहले से भरे हुए BLOs को सौंपे गए, ताकि बिना जांच-पड़ताल के नाम काटे जा सकें। गहलोत ने इसे निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया पर सीधा हमला बताया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि जब कई ईमानदार प्रशासनिक अधिकारी और BLOs ने इस “लोकतंत्र की हत्या” में शामिल होने से इनकार किया, तो सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोगों, यानी बीजेपी नेताओं, द्वारा उन्हें तबादलों की धमकियां दी गईं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ प्रशासनिक दबाव नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को डराने की कोशिश है, जिसे कांग्रेस किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।

गहलोत ने दावा किया कि यह पूरा कुप्रयास उनके निर्वाचन क्षेत्र सरदारपुरा तक में देखने को मिला। उन्होंने बताया कि इस गंभीर मामले को लेकर उन्होंने राज्य निर्वाचन आयुक्त नवीन महाजन से फोन पर बातचीत कर पूरी स्थिति से अवगत कराया है और तत्काल, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि मतदाता सूची की पवित्रता और लोकतंत्र की विश्वसनीयता को सुरक्षित रखा जा सके। अशोक गहलोत ने बीजेपी के दबाव में काम कर रहे अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि समय बदलते देर नहीं लगती। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन जो भी अधिकारी नियमों और संविधान के विरुद्ध कार्य करेगा, उसकी कानूनी जवाबदेही तय होगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से संवैधानिक मर्यादा का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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