शैलेन्द्र नेगी | चमोली 31 दिसंबर 2025
सुरंग के अंदर अचानक टकराईं ट्रेनें
उत्तराखंड के चमोली ज़िले में स्थित विष्णुगढ़–पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना से मंगलवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जिसने काम कर रहे कर्मचारियों और प्रशासन—दोनों को हिला कर रख दिया। परियोजना की सुरंग के भीतर दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गईं, जिससे करीब 60 लोग घायल हो गए। हादसे के बाद सुरंग के अंदर अफरा-तफरी मच गई और कुछ देर के लिए काम पूरी तरह ठप हो गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ये लोको ट्रेनें सुरंग के भीतर निर्माण सामग्री और कर्मचारियों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं। बताया जा रहा है कि सीमित दृश्यता और तकनीकी चूक के चलते दोनों ट्रेनें आमने-सामने आ गईं और टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई लोग गिर पड़े और आसपास रखा सामान भी बिखर गया।
घायलों को बाहर निकालना बना चुनौती
हादसे के बाद सुरंग के अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन गया। बचाव दल और परियोजना कर्मचारियों ने मिलकर घायलों को बाहर पहुंचाया। कई लोगों को हाथ-पैर और सिर में चोटें आई हैं। राहत की बात यह रही कि किसी के गंभीर रूप से फंसे होने की सूचना नहीं है, हालांकि कई घायलों को एहतियातन अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इलाज जारी, हालत स्थिर
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, अधिकांश घायल खतरे से बाहर हैं। डॉक्टरों की टीमें लगातार उनकी निगरानी कर रही हैं। कुछ कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि जिनकी चोटें ज्यादा हैं, उन्हें कुछ समय तक निगरानी में रखा जाएगा।
जांच के आदेश, काम अस्थायी रूप से रोका गया
हादसे के बाद प्रशासन और परियोजना प्रबंधन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि टक्कर कैसे हुई और सुरक्षा मानकों में कहां चूक हुई। फिलहाल सुरंग के भीतर का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, ताकि सुरक्षा की दोबारा समीक्षा की जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे मजदूरों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरंग जैसे सीमित और जोखिम भरे इलाकों में काम के दौरान तकनीकी निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कितना ज़रूरी है, यह घटना उसी की याद दिलाती है।
हादसे से सबक ज़रूरी
विष्णुगढ़–पीपलकोटी परियोजना में हुआ यह हादसा सौभाग्य से जानलेवा नहीं रहा, लेकिन इससे मिले सबक बेहद अहम हैं। ज़रूरत है कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत किया जाए, ताकि काम करने वाले लोगों की जान और भरोसा—दोनों सुरक्षित रह सकें।




