संजीव कुमार । कोलकाता 13 दिसंबर 2025
कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में फुटबॉल जगत के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी को देखने उमड़ा जनसैलाब उस वक्त स्तब्ध और आक्रोशित हो गया, जब बहुप्रचारित इवेंट कुछ ही मिनटों में खत्म हो गया। जिस आयोजन को प्रशंसकों के लिए यादगार बनाया जाना था, वह अव्यवस्था, नाराज़गी और हंगामे में बदल गया। हजारों की संख्या में मौजूद दर्शक लंबे इंतज़ार, ऊंची टिकट कीमतों और अव्यवस्थित प्रबंधन से खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगे।
कार्यक्रम की शुरुआत से पहले ही स्टेडियम और उसके आसपास “मेसी–मेसी” के नारों से माहौल गूंज रहा था। प्रशंसक बैनर, पोस्टर और झंडों के साथ अपने पसंदीदा खिलाड़ी की एक झलक पाने को बेताब थे। लेकिन जैसे ही मेसी कुछ ही मिनटों के लिए मंच पर दिखाई दिए और फिर अचानक कार्यक्रम छोड़कर बाहर चले गए, दर्शकों का उत्साह तेजी से निराशा में बदल गया। कई लोगों को यह भी ठीक से समझ नहीं आया कि कार्यक्रम इतनी जल्दी क्यों खत्म कर दिया गया।
मेसी के स्टेडियम से निकलते ही स्थिति बेकाबू हो गई। गुस्साए दर्शकों ने प्लास्टिक की बोतलें, कुर्सियां और अन्य सामान मैदान की ओर फेंकना शुरू कर दिया। कुछ जगहों पर पोस्टर और बैनर फाड़े गए, तो कुछ दर्शकों ने आयोजनकर्ताओं के खिलाफ नारेबाज़ी की। हालात को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी और कुछ समय के लिए स्टेडियम में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
दर्शकों का आरोप था कि टिकट के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली गई, लेकिन बदले में उन्हें मेसी को देखने या कार्यक्रम का आनंद लेने का पूरा मौका नहीं दिया गया। कई प्रशंसकों ने इसे “कुप्रबंधन” और “धोखे” का उदाहरण बताया। सोशल मीडिया पर भी इवेंट को लेकर नाराज़गी फूट पड़ी और आयोजकों की जमकर आलोचना होने लगी।
इस घटना ने बड़े अंतरराष्ट्रीय सितारों के आयोजनों में योजना, पारदर्शिता और भीड़ प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फुटबॉल प्रेमियों के लिए जो शाम जश्न की होनी चाहिए थी, वह अव्यवस्था और हताशा के साथ खत्म हुई। कोलकाता में मेसी का यह दौरा खेल प्रेम के बजाय विवाद और अफरा-तफरी के कारण याद किया जा रहा है।




