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हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के नाम पर जमीन अधिग्रहण अवैध! किशन रेड्डी का बड़ा बयान, रेलवे ने राज्यों को नहीं भेजा प्रस्ताव

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | हैदराबाद | 10 अक्टूबर 2026

हैदराबाद से चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे को हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जोड़ने की प्रस्तावित योजनाओं के बीच जमीन अधिग्रहण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने स्पष्ट कहा है कि रेलवे की ओर से आधिकारिक मांग भेजे बिना इन परियोजनाओं के नाम पर किया जा रहा कोई भी भूमि अधिग्रहण अवैध है। उनके बयान ने उन लोगों की चिंताओं को महत्वपूर्ण बना दिया है, जिनकी जमीन इन प्रस्तावित रेल कॉरिडोर के लिए लिए जाने की आशंका है।

द हिंदू की 10 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, किशन रेड्डी ने नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि रेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु और हैदराबाद-पुणे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए संबंधित राज्य सरकारों को भूमि अधिग्रहण का कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं भेजा गया है।

तीन बड़े रेल कॉरिडोर, लेकिन भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव नहीं

प्रस्तावित परियोजनाओं में हैदराबाद को चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे से हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ने की योजना शामिल है। इन कॉरिडोर के लिए अभी अलाइनमेंट यानी रेल मार्ग के संभावित रास्ते का अध्ययन किया जा रहा है। इसी वजह से परियोजनाओं की अंतिम रूपरेखा और भूमि की जरूरत को लेकर प्रक्रिया अभी आगे बढ़ रही है।

किशन रेड्डी के मुताबिक, जब रेलवे ने संबंधित राज्यों को भूमि अधिग्रहण के लिए आधिकारिक मांग ही नहीं भेजी है, तो इन परियोजनाओं के नाम पर जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने ऐसे अधिग्रहण को अवैध बताया है।

हालांकि, उनके बयान को संबंधित परियोजनाओं के लिए सभी प्रकार की प्रारंभिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं समझना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, अलाइनमेंट का अध्ययन जारी है और भूमि अधिग्रहण के लिए आधिकारिक प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। किसी विशिष्ट जमीन पर कार्रवाई की वैधता उस मामले के दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

जमीन मालिकों की चिंता और प्रशासन की जवाबदेही

भूमि अधिग्रहण का सवाल सीधे किसानों, जमीन मालिकों और उन परिवारों से जुड़ा है, जिनकी संपत्ति किसी प्रस्तावित परियोजना के रास्ते में आ सकती है। ऐसे मामलों में स्पष्ट सूचना, आधिकारिक दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया का पालन बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति को बताया जा रहा है कि उसकी जमीन हाई-स्पीड रेल परियोजना के लिए ली जाएगी, तो उसे संबंधित विभाग से लिखित आदेश और अधिग्रहण की वैधानिक स्थिति की जानकारी मांगनी चाहिए।

किशन रेड्डी का बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इससे परियोजना की वास्तविक स्थिति और जमीन अधिग्रहण के दावों के बीच अंतर स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। यदि रेलवे ने अभी तक राज्यों को आधिकारिक प्रस्ताव नहीं भेजा है, तो किसी भी कथित अधिग्रहण प्रक्रिया के बारे में संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाना चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

तीनों प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए अलाइनमेंट अध्ययन जारी रहने के कारण आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि रेलवे मार्ग को कब अंतिम रूप देता है और भूमि की जरूरत को लेकर संबंधित राज्य सरकारों को औपचारिक प्रस्ताव कब भेजे जाते हैं। इसके बाद ही भूमि अधिग्रहण से संबंधित अगली कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल, केंद्रीय मंत्री के बयान का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के नाम पर जमीन अधिग्रहण का दावा करने वाली किसी भी कार्रवाई की आधिकारिक और कानूनी स्थिति की जांच जरूरी है। परियोजना के नाम पर जमीन से जुड़े दावे किए जाने पर लोगों को मौखिक आश्वासनों के बजाय संबंधित विभाग के दस्तावेजों और लिखित आदेशों पर भरोसा करना चाहिए।

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