एबीसी नेशनल न्यूज | पोरबंदर | 22 फरवरी 2026
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक महान व्यक्तित्वों ने योगदान दिया, लेकिन कुछ ऐसी शख्सियतें भी रहीं जिनकी शक्ति शोर नहीं करती, बल्कि इतिहास की दिशा बदल देती है। Kasturba Gandhi ऐसी ही एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व थीं। “बा” के नाम से लोकप्रिय कस्तूरबा गांधी ने त्याग, धैर्य, साहस और सत्याग्रह के माध्यम से न केवल Mahatma Gandhi के जीवन में अटूट सहारा बनकर भूमिका निभाई, बल्कि स्वयं स्वतंत्रता आंदोलन की एक सशक्त योद्धा के रूप में पहचान बनाई। 11 अप्रैल 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मी कस्तूरबा गांधी का विवाह कम आयु में मोहनदास करमचंद गांधी से हुआ। औपचारिक शिक्षा सीमित होने के बावजूद उन्होंने जीवन के संघर्षों से जो सीख प्राप्त की, वही उनकी वास्तविक ताकत बनी। चार पुत्रों की परवरिश, आश्रम जीवन की जिम्मेदारियां और आंदोलन की चुनौतियों के बीच उन्होंने संतुलन और दृढ़ता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी के साथ रहते हुए कस्तूरबा ने सत्याग्रह की राह पर सक्रिय भागीदारी की। 1913 में महिलाओं के अधिकारों के लिए आंदोलन में शामिल होकर जेल जाना उस दौर में असाधारण साहस का परिचायक था। भारत लौटने के बाद असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में भी वे लगातार सक्रिय रहीं। जब गांधीजी जेल में होते, तो कई अवसरों पर उन्होंने आंदोलन की जिम्मेदारी संभाली और महिलाओं को संगठित किया।
कस्तूरबा गांधी का व्यक्तित्व धैर्य, सहनशीलता और सेवा की मिसाल था। अस्पृश्यता उन्मूलन, महिलाओं की शिक्षा और स्वदेशी को बढ़ावा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आश्रम जीवन में उन्होंने समानता और सेवा के मूल्यों को व्यवहार में उतारकर समाज को व्यावहारिक संदेश दिया। गांधीजी स्वयं स्वीकार करते थे कि अहिंसा और सहनशीलता का गहरा पाठ उन्हें कस्तूरबा से ही मिला।
22 फरवरी 1944 को पुणे के Aga Khan Palace में नजरबंदी के दौरान उनका निधन हो गया। बीमारी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका मन राष्ट्र और सेवा के प्रति समर्पित रहा। उनके अंतिम क्षणों में गांधीजी उनके साथ थे, और पूरे राष्ट्र ने उन्हें सत्य, सेवा और त्याग की प्रतीक के रूप में श्रद्धांजलि दी।
कस्तूरबा गांधी केवल महात्मा गांधी की जीवनसंगिनी भर नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी क्रांतिकारी आत्मा थीं जिन्होंने शांत रहकर भी स्वतंत्रता आंदोलन की नींव को मजबूत किया। उनकी सादगी, दृढ़ता और सेवा की भावना आज भी समाज और विशेषकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
राष्ट्र उनकी पुण्य स्मृति को नमन करता है—सत्य, अहिंसा और सेवा की वह अमर ज्योति, जो पीढ़ियों को मार्ग दिखाती रहेगी।




