[the_ad id="179"]
Home » National » कश्मीर ठंड के चरम पर: चिल्ला-ए-कलां शुरू, बर्फीली मस्ती संग सावधानी अहम

कश्मीर ठंड के चरम पर: चिल्ला-ए-कलां शुरू, बर्फीली मस्ती संग सावधानी अहम

तारिक बांदे | श्रीनगर 21 दिसंबर 2025

जम्मू-कश्मीर में सर्दियों का सबसे कठोर दौर ‘चिल्ला-ए-कलां’ शुरू हो गया है। यह वह समय होता है जब ठंड अपने चरम पर पहुंच जाती है और जनजीवन पर इसका सीधा असर दिखने लगता है। अगले 40 दिन, यानी 21 दिसंबर से 31 जनवरी तक कश्मीर में कड़ाके की सर्दी लोगों की परीक्षा लेती है। यह कश्मीर की ज़िंदगी और सहनशीलता का प्रतीक है। जब सर्दी उरूज पर होती है, हर तरफ बर्फ जमी होती है। जिंदगी मुहाल होती है। यह मौसम कश्मीरियों की जिंदगी का इम्तेहान लेती है। इस दौरान पर्यटकों का मेला भी लगा होता है। दुनियाभर से लोग कश्मीर की खूबसूरती के लिए आते हैं। इस दौरान अक्सर सड़कें बंद होना, बिजली की कटौती और पानी की दिक्कत आम बात है। इसलिए स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं—गरम कपड़े पहनना, लोकल सलाह मानना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना ज़रूरी होता है।

आख़िर क्या है चिल्ला-ए-कलां?

‘चिल्ला-ए-कलां’ फारसी शब्द है, जिसका मतलब है भीषण ठंड का 40 दिन का दौर। इस दौरान बर्फबारी सबसे ज़्यादा होती है। झीलें जमने लगती हैं, नल की पाइपें फ्रीज़ हो जाती हैं और कई इलाकों में रोज़मर्रा की ज़िंदगी धीमी पड़ जाती है।

कितनी पड़ती है ठंड?

इस समय श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे इलाकों में तापमान अक्सर -5 डिग्री से -10 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। हाल ही में श्रीनगर में तापमान -8.5 डिग्री तक दर्ज किया गया, जिसे बीते कई दशकों की सबसे ठंडी रातों में गिना जा रहा है। ठंड इतनी तेज़ होती है कि डल झील तक जम जाती है।

बर्फबारी और मौसम का मिज़ाज

चिल्ला-ए-कलां के दौरान ऊपरी इलाकों में लगातार बर्फबारी होती है। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है, हालांकि बीच-बीच में मौसम साफ़ होने की भी संभावना रहती है।

लोग कैसे करते हैं सामना?

कश्मीर के लोग इस दौर के लिए पहले से तैयार रहते हैं। घरों में अंगीठी, कांगड़ी, हीटर, मोटे कपड़े और लकड़ी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। इस मौसम में गरम कहवा, सूखे मेवे और पारंपरिक कश्मीरी खाना लोगों को ठंड से लड़ने में मदद करता है।

पर्यटकों के लिए रोमांच और चुनौती

चिल्ला-ए-कलां पर्यटकों के लिए बेहद खूबसूरत लेकिन चुनौतीपूर्ण समय होता है। गुलमर्ग जैसे इलाकों में स्कीइंग और विंटर स्पोर्ट्स का मज़ा लिया जाता है। बर्फ से ढकी वादियां, जमी हुई डल झील और शांत माहौल पर्यटकों को आकर्षित करता है। लेकिन ठंड इतनी तेज़ होती है कि बिना तैयारी बाहर निकलना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।

इसके बाद भी जाती नहीं सर्दी

चिल्ला-ए-कलां के बाद भी ठंड पूरी तरह खत्म नहीं होती। इसके बाद आता है ‘चिल्ला-ए-खुर्द’ (20 दिन) और फिर ‘चिल्ला-ए-बच्चा’ (10 दिन), जिनमें सर्दी धीरे-धीरे कम होती है। चिल्ला-ए-कलां सिर्फ मौसम का नाम नहीं है, कश्मीर की ज़िंदगी और सहनशीलता का प्रतीक है। यह दौर मुश्किल जरूर है, लेकिन कश्मीर के लोग इसे अपने धैर्य, तैयारी और परंपराओं के साथ हर साल झेलते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *