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कैलाश–योहानी के सुर और जायका इंडिया का: ‘आद्या कौशलम्’ ने जीता दिल्ली का दिल

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एबीसी डेस्क 15 दिसंबर 2025

दिल्ली की सर्द शामें जब कैलाश खेर की सूफियाना आवाज़ और योहानी की अंतरराष्ट्रीय पॉप धुनों से गूंज उठीं, तो हजारों दीवाने संगीत में डूबकर झूमते नजर आए। सुरों के इस जादू के बीच देशभर के जायकों की खुशबू और भारतीय संस्कृति की आत्मा ने जो माहौल रचा, वह राजधानी के लिए एक यादगार अनुभव बन गया। इसी भव्य, जीवंत और सकारात्मक वातावरण के केंद्र में रही आद्या कौशलम्—एक ऐसी समर्पित संस्था, जिसने स्वाद, संगीत और सामाजिक चेतना को एक सूत्र में पिरोकर दिल्ली वासियों का दिल जीत लिया। यही वजह है कि लोगों ने एक स्वर में कहा—आद्या कौशलम् को शुक्रिया।

‘आद्या’ यानी मूल, शाश्वत और प्रारंभिक चेतना, और ‘कौशलम्’ यानी दक्षता, संतुलन और कुशलता—अपने नाम की तरह ही आद्या कौशलम् का कार्यदर्शन भी गहरे अर्थों से भरा है। यह संस्था केवल आयोजनों तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा, योग और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति के समग्र विकास का संकल्प है। आद्या कौशलम् का उद्देश्य हर आदमी के भीतर छिपे सामर्थ्य को जाग्रत करना, उसे संतुलित जीवन की ओर प्रेरित करना और समाज को सकारात्मक दिशा देना है।

महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में आद्या कौशलम् का योगदान विशेष रूप से सराहनीय रहा है। संस्था द्वारा संचालित कौशल विकास कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। योग और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों के जरिए शारीरिक व मानसिक संतुलन पर जोर दिया जाता है, ताकि महिलाएं न केवल अपने परिवार बल्कि समाज के निर्माण में भी सशक्त भूमिका निभा सकें।

बाल विकास आद्या कौशलम् की प्राथमिकताओं में एक अहम स्तंभ है। शिक्षा, पोषण और संस्कार—इन तीनों को साथ लेकर संस्था बच्चों के समग्र विकास पर काम कर रही है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में, जहां शिक्षा अक्सर अंकों तक सिमट जाती है, वहां आद्या कौशलम् बच्चों को जीवन-मूल्य, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाकर भविष्य के संवेदनशील नागरिक गढ़ने का कार्य कर रही है।

पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर भी आद्या कौशलम् की पहलें प्रशंसनीय हैं। वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरणीय जागरूकता कार्यक्रम यह संदेश देते हैं कि विकास तभी सार्थक है जब वह प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखे। साथ ही, संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के पुनर्स्थापन में संस्था की सक्रिय भूमिका यह साबित करती है कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।

राष्ट्रीय स्ट्रीट फूड फेस्टिवल जैसे भव्य आयोजनों में आद्या कौशलम् की भागीदारी ने इस पूरे अनुभव को और ऊंचाई दी। जहां एक ओर देश के कोने-कोने से आए स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने ‘जायका इंडिया’ का स्वाद चखाया, वहीं दूसरी ओर आद्या कौशलम् ने इस उत्सव को संस्कृति, सेवा और सामाजिक चेतना से जोड़ दिया। कैलाश खेर और योहानी के सुरों के साथ जब यह संदेश जुड़ा, तो यह आयोजन सिर्फ एक फेस्टिवल नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा का उत्सव बन गया।

कुल मिलाकर, आद्या कौशलम् ने यह साबित कर दिया है कि जब किसी संस्था की जड़ें भारतीय मूल्यों में हों और दृष्टि समग्र सामाजिक विकास की हो, तो वह समाज पर गहरी और सकारात्मक छाप छोड़ती है। दिल्ली वासियों का आभार पूरी तरह जायज़ है—क्योंकि आद्या कौशलम् ने स्वाद, सुर, संस्कृति और सेवा को एक साथ जोड़कर राजधानी को एक ऐसा अनुभव दिया, जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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