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जैसवाल-कोहली-रोहित का तूफ़ान—भारत ने SA को 9 विकेट से हराकर जीती श्रृंखला

सूफियान बिन फरहान। विशाखापत्तनम 6 दिसंबर 2025

विशाखापट्टनम में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे में टीम इंडिया ने वह क्रिकेट पेश किया जिसे देखकर न सिर्फ स्टेडियम झूम उठा, बल्कि विरोधी खेमे ने भी भारतीय टीम की काबिलियत को सलाम किया। दक्षिण अफ्रीका के 270 रन के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को भारत ने जिस सहजता और प्रभुत्व के साथ हासिल किया, उसने यह साबित कर दिया कि भारतीय टीम सीमित ओवरों के क्रिकेट में एक बार फिर आत्मविश्वास और संतुलन के चरम पर है। भारत ने यह मुकाबला 61 गेंद शेष रहते 9 विकेट से अपने नाम किया।

दक्षिण अफ्रीका की ओर से एकमात्र बड़ी चुनौती क्विंटन डी कॉक ने पेश की। उनकी 106 रन की शानदार पारी ने टीम को संभाला, लेकिन दूसरे छोर से कोई भी बल्लेबाज टिककर भारत के स्पिन और पेस आक्रमण का सामना नहीं कर सका। प्रसीथ कृष्णा ने अपनी सटीक लाइन और उछाल से चार विकेट चटकाए, जबकि कुलदीप यादव ने भी अपनी फिरकी से अफ्रीकी बल्लेबाजों को जकड़ते हुए चार विकेट झटके। रविंद्र जडेजा और अर्शदीप सिंह ने मिलकर पारी पर नियंत्रण बनाए रखा। नतीजा यह हुआ कि दक्षिण अफ्रीका लगातार दबाव में रहा और 50 ओवर भी पूरे नहीं खेल पाया।

लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय शीर्ष क्रम ने जिस आत्मविश्वास और खूबसूरती से बल्लेबाजी की, वह किसी क्लासिक प्रदर्शन से कम नहीं था। कप्तान रोहित शर्मा और युवा सनसनी यशस्वी जैसवाल ने शुरुआती ही ओवरों से लय हासिल कर ली। रोहित ने 75 रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दी, लेकिन असली चमक जैसवाल की बल्ले से निकली। उन्होंने 116 रनों की नाबाद पारी खेलकर दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों को बेबस कर दिया। स्ट्रोक प्ले, टाइमिंग और शॉट सिलेक्शन—तीनों में जैसवाल ने अपनी क्लास का प्रदर्शन किया।

जब रोहित का विकेट गिरा, तब क्रीज पर आए विराट कोहली ने मैच को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया। कोहली ने तेजी से रन बनाते हुए 45 गेंदों में 65 रन ठोके। इस पारी ने न सिर्फ भारतीय फैंस को एक बार फिर पुराने कोहली की झलक दी, बल्कि टीम को आसानी से लक्ष्य तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। कोहली को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया, जबकि जैसवाल को उनकी शानदार शतकीय पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच का सम्मान मिला।

मैच के बाद कोहली ने कहा कि इस सीरीज में वह मानसिक रूप से मुक्त महसूस कर रहे थे, और उनकी प्राथमिकता टीम की जरूरत के अनुसार बल्लेबाजी करना था। जैसवाल ने भी बताया कि रोहित और बाद में कोहली के साथ बातचीत ने उन्हें लक्ष्य सेट करने और अपनी पारी को संतुलित करने में मदद की। कप्तान केएल राहुल ने जीत का श्रेय गेंदबाजों को दिया, जिन्होंने शुरुआती दबाव बनाकर मध्य ओवरों में विकेटों की झड़ी लगा दी।

दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा ने स्वीकार किया कि उनकी टीम ने पर्याप्त रन नहीं बनाए, और भारत ने हर विभाग में बेहतर खेल दिखाया। उन्होंने कहा कि भारतीय बल्लेबाजों ने तेज और स्पिन—दोनों तरह की गेंदबाजी को शानदार तरीके से संभाला।

भारत की यह जीत न सिर्फ श्रृंखला में निर्णायक साबित हुई बल्कि यह टीम इंडिया की गहराई, संतुलन और युवा-वरिष्ठ संयोजन की ताकत को भी उजागर करती है। गेंदबाजी में प्रसीथ और कुलदीप, जबकि बल्लेबाजी में जैसवाल, रोहित और कोहली—हर तरफ भारतीय चमक दिखाई दी। यह प्रदर्शन आने वाले टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम की तैयारियों को ऊंचा मनोबल प्रदान करता है।

विशाखापट्टनम की यह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन यादगार मौकों में से एक रहेगी जब हर खिलाड़ी ने अपने रोल को पूरी महारत के साथ निभाया और टीम ने मिलकर एक शानदार, एकतरफा और प्रभावी जीत दर्ज की।

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