गाज़ा 3 अक्टूबर 2025
गाज़ा पट्टी एक बार फिर खून और बारूद से भर गई है। इज़राइल के ताज़ा हवाई और जमीनी हमलों में स्थानीय अधिकारियों और स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़ 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। मारे गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। कई शव ध्वस्त इमारतों के मलबे से निकाले गए। ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब हमास, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पेश किए गए तथाकथित “शांति प्रस्ताव” पर विचार कर रहा है।
हिंसा और तबाही का सिलसिला
इज़रायली सेना का दावा है कि इन हमलों में हमास के ठिकाने, हथियार भंडार और सुरंगों को निशाना बनाया गया। लेकिन गाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि मारे गए अधिकतर लोग आम नागरिक हैं। अस्पतालों में लाशों का अंबार है और घायलों की संख्या इतनी है कि चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बिजली कटौती, दवाओं की कमी और नाकेबंदी के कारण हालात और बिगड़ गए हैं। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि गाज़ा में अब मानवीय संकट बेकाबू होता जा रहा है।
ट्रम्प की शांति योजना और हमास की दुविधा
इस हिंसा की पृष्ठभूमि में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक 20 सूत्रीय शांति प्रस्ताव रखा है। इसमें शर्त रखी गई है कि हमास अपने कब्ज़े में रखे गए बंधकों को रिहा करे, हथियार डाल दे और गाज़ा का राजनीतिक नियंत्रण छोड़ दे। बदले में हजारों फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ा जाएगा और अंतरराष्ट्रीय मदद बहाल की जाएगी। इज़राइल ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कई शर्तें जोड़ी हैं—जैसे कि सुरक्षा नियंत्रण इज़राइल के पास रहेगा और चरणबद्ध वापसी होगी।
हमास ने अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है। उसकी राजनीतिक और सैन्य शाखाओं के बीच मतभेद है। राजनीतिक धड़ा बातचीत के पक्ष में है, जबकि सैन्य नेतृत्व का कहना है कि यह योजना हमास को खत्म करने और गाज़ा को इज़राइल के नियंत्रण में रखने की चाल है। मिस्र और क़तर मध्यस्थता कर रहे हैं और हमास पर दबाव डाल रहे हैं कि वह किसी तरह इस योजना पर सहमति दे ताकि खूनखराबा रुके।
मानवीय संकट गहराता जा रहा है
गाज़ा में मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा संघर्ष में अब तक 66,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और करीब 1,70,000 घायल हैं। लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और भोजन, पानी तथा दवाइयों की भारी कमी है। इमारतों का बड़ा हिस्सा खंडहर में तब्दील हो गया है और लगभग पूरा गाज़ा आज मानवीय त्रासदी का प्रतीक बन चुका है।
आगे क्या?
हमास के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि यदि वह ट्रम्प के प्रस्ताव को ठुकराता है तो इज़रायली हमले और तेज़ होंगे, लेकिन अगर मान लेता है तो उसकी राजनीतिक पकड़ कमजोर हो जाएगी। इज़राइल की रणनीति साफ है—सैन्य दबाव डालकर हमास को हथियार डालने के लिए मजबूर करना। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय मध्यस्थता और शांति की अपील कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गाज़ा के निर्दोष नागरिक हर दिन गोलियों और बमों की कीमत अपनी जान देकर चुका रहे हैं।




