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गाज़ा में इज़राइल का नया हमला, फ़लस्तीनी ट्रम्प की शांति योजना पर लगाए उम्मीदें

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यरुशलम / गाज़ा सिटी  6 अक्टूबर 2025 |

मध्य पूर्व एक बार फिर तनाव की आग में झुलस रहा है। इज़राइली सेनाओं ने रविवार देर रात गाज़ा के कई इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें हमास के कथित ठिकानों को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर, युद्ध से थके फ़लस्तीनी नागरिक अब अपनी उम्मीदें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की “नए शांति प्रस्ताव योजना” पर टिकाए हुए हैं, जिसे उन्होंने पिछले सप्ताह “सबके लिए न्याय” कहकर पेश किया था।

इज़राइल का दावा — ‘हमास के ठिकाने पर जवाबी कार्रवाई’

इज़राइल डिफेंस फोर्स (IDF) के प्रवक्ता के अनुसार, गाज़ा के उत्तर और खान यूनिस क्षेत्रों में किए गए ये हवाई हमले “हमास के रॉकेट लॉन्च स्थलों और हथियार भंडार” पर केंद्रित थे। इज़राइली अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में दक्षिणी इज़राइल की सीमाओं पर रॉकेट हमलों की जवाबी कार्रवाई के रूप में यह ऑपरेशन चलाया गया। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि इन हमलों में कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और सैकड़ों नागरिकों को रातों-रात सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। हालांकि, गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि हमलों में कई निर्दोष नागरिक, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं, घायल हुए हैं। फिलहाल अस्पतालों में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है।

फ़लस्तीनी पक्ष — “अब उम्मीद ट्रम्प योजना से”

फ़लस्तीनी अथॉरिटी और कई स्थानीय संगठनों का कहना है कि निरंतर युद्ध से अब गाज़ा की स्थिति मानवीय संकट की दहलीज पर पहुंच चुकी है। पानी, बिजली और दवाओं की भारी कमी ने आम लोगों की ज़िंदगी को बेहद कठिन बना दिया है। ऐसे में, ट्रम्प की “Peace for Stability” योजना को लेकर लोगों में हल्की सी उम्मीद जगी है।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि उनका प्रस्ताव “दोनों पक्षों के लिए जीत की स्थिति” तैयार करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया था कि बंधकों की रिहाई और सीमित युद्धविराम पर “जल्द ही सकारात्मक परिणाम” देखने को मिलेंगे। इस बयान को गाज़ा में राहत की उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि कई विश्लेषक इसे चुनावी रणनीति भी बता रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया — मिश्र और क़तर कर रहे मध्यस्थता

इस बीच, मिस्र और क़तर की सरकारें फिर से युद्धविराम की कोशिशों में जुटी हैं। दोनों देशों के कूटनीतिक प्रतिनिधियों ने इज़राइल और हमास के बीच संपर्क बढ़ाया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि यदि युद्ध नहीं रुका तो “गाज़ा में मानवीय आपदा अगले कुछ दिनों में भयावह रूप ले सकती है।” अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने ट्रम्प के बयान पर टिप्पणी करने से इंकार किया है, लेकिन व्हाइट हाउस ने यह संकेत दिया है कि “किसी भी शांति पहल का समर्थन तभी किया जाएगा जब उसमें इज़राइल की सुरक्षा और फ़लस्तीनी स्वायत्तता दोनों सुनिश्चित हों।”

गाज़ा में जमीनी हालात — तबाही और उम्मीद के बीच जिंदगी

गाज़ा सिटी से आ रही तस्वीरें और वीडियो भयावह हैं — टूटे घर, जले बाज़ार और अस्पतालों में घायल बच्चों की चीखें। पर इसी मलबे के बीच कुछ लोगों के चेहरों पर अब भी उम्मीद की एक किरण है। 65 वर्षीय मोहम्मद खालिद कहते हैं, “हमने युद्ध बहुत देखे, लेकिन अगर ट्रम्प की योजना सच में शांति ला सके, तो हमें उसे मौका देना चाहिए।” इज़राइल की सीमा के नज़दीकी शहर अश्केलोन में लोग अब भी सतर्क हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम हर रात सायरन की आवाज़ सुनते हैं। हम सिर्फ़ चाहते हैं कि दोनों तरफ़ यह नर्क खत्म हो।”

निष्कर्ष — शांति की डोर अब राजनीति के हाथों में

वर्तमान हालात में गाज़ा और इज़राइल के बीच तनाव फिर से चरम पर है। एक ओर मिसाइलों की गूंज है, दूसरी ओर राजनीतिक शांति वार्ता की धीमी फुसफुसाहट। डोनाल्ड ट्रम्प की यह नई शांति योजना फिलहाल चर्चा में है, लेकिन सवाल अब भी वही है — क्या यह योजना युद्ध को रोक सकेगी या यह भी पहले की पहलों की तरह शब्दों में सिमट जाएगी?

फिलहाल गाज़ा के नागरिकों के लिए यह सिर्फ़ एक योजना नहीं, बल्कि आखिरी उम्मीद बन गई है। जब गोलियों की आवाज़ थमेगी, तभी तय होगा कि यह उम्मीद हकीकत बनती है या फिर एक और अधूरी कहानी में बदल जाती है।

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