राजस्थान की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक साख पर इन दिनों एक गंभीर सवाल उठ रहा है: क्या राज्य में अब ईमानदारी और दक्षता ही तबादले की वजह बन गई है? बीते कुछ महीनों में जिन पुलिस अफसरों ने अपनी कड़ी कार्रवाई से जनता का विश्वास जीता, अपराधियों में खौफ पैदा किया और सिस्टम को झकझोरा, वे सभी अचानक एक ही प्रशासनिक आदेश के तहत ट्रांसफर लिस्ट में शामिल कर दिए गए हैं। यह पैटर्न जनता और राजनीतिक गलियारों दोनों में यह संदेह पैदा कर रहा है कि क्या “अच्छा काम करना अब सबसे बड़ा अपराध है?”
इस प्रशासनिक अस्थिरता का सबसे बड़ा उदाहरण जोधपुर रेंज के आईजी विकास कुमार का है, जिन्होंने नशे के कारोबारियों पर कड़ा शिकंजा कसकर पूरे मारवाड़ में ड्रग माफिया के बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया था, जिससे जनता ने बड़ी राहत महसूस की थी।
इसी तरह, राजस्थान पुलिस के सबसे सख्त अफसरों में गिने जाने वाले एडीजी दिनेश एम.एन. ने अपनी “सर्जिकल स्ट्राइक” जैसी कार्रवाई से अपराध और गैंगवार पर जबरदस्त रोक लगाई, जिससे राज्य पुलिस का मनोबल ऊंचा हुआ।
एडीजी वी.के. सिंह ने नकल माफिया के खिलाफ मोर्चा खोलकर फर्जी परीक्षाओं और भर्ती घोटालों के पूरे जाल को तोड़ा, जिससे लाखों युवाओं में बदलाव की उम्मीद जगी थी।
इसके अतिरिक्त, आईजी राहुल प्रकाश ने भी अपने कार्यकाल में सड़कों पर अनुशासन और साइबर अपराधियों पर नकेल कसकर पुलिस की छवि सुधारी थी।
हालांकि, इन चारों ही प्रभावी अधिकारियों के अत्यंत सफल अभियानों के बावजूद, अचानक प्रशासनिक फेरबदल हुआ और उनका तबादला कर दिया गया। लोगों का कहना है कि “जो अपराधियों के खिलाफ सख्ती दिखाए, उसका तबादला पक्का है,” और सोशल मीडिया पर यह व्यंग्य चल रहा है कि “यहां मेडल नहीं, ट्रांसफर मिलता है।”
इस लगातार तबादले के पैटर्न ने राज्य की प्रशासनिक साख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि इससे पुलिस बल में यह संदेश गया है कि काम का इनाम, ट्रांसफर बन गया है। यह निराशा निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक फैली है, जो मानते हैं कि प्रभावी कार्रवाई शुरू करते ही, कुछ प्रभावशाली लॉबियों के दबाव में उनके तबादले का आदेश जारी हो जाता है।
जनता अब खुलेआम सवाल कर रही है: “विकास कुमार ने नशे पर लगाम लगाई, एम.एन. ने अपराधियों को रोका, वी.के. सिंह ने नकल माफिया तोड़ा, राहुल प्रकाश ने सिस्टम सुधारा… लेकिन चारों को हटा दिया गया। तो आखिर फिरकी कौन ले रहा है?” विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईमानदारी पर ‘फाइल’ भारी पड़ती रहेगी, तो यह प्रशासनिक अस्थिरता कानून व्यवस्था को कमजोर करेगी, और अंततः जनता के हीरो, सिस्टम के लिए खतरा बनकर रह जाएंगे।





