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कोरोना सिर्फ एक वायरस नहीं? शरीर में वर्षों से ‘सोए’ वायरस को भी जगा सकता है Covid-19, नई स्टडी ने बढ़ाई चिंता

अस्पताल में भर्ती 1,000 से ज्यादा कोविड मरीजों पर अध्ययन; करीब आधे में पुराने निष्क्रिय वायरस दोबारा सक्रिय होने के संकेत—EBV और CMV जैसे वायरस भी शामिल, गंभीर बीमारी और Long Covid से संबंध की आशंका

स्वास्थ्य | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 7 अगस्त 2026

कोरोना जाने के बाद भी शरीर के भीतर कहानी खत्म नहीं होती

कोविड-19 को लेकर सामने आई एक नई स्टडी ने बीमारी के असर को समझने के लिए एक और महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है। अब तक आम तौर पर यह समझा जाता रहा है कि कोरोना वायरस शरीर में प्रवेश करता है, संक्रमण पैदा करता है और ठीक होने के बाद ज्यादातर लोगों में उसका सीधा असर धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। लेकिन नई रिसर्च बताती है कि गंभीर कोविड संक्रमण शरीर में पहले से मौजूद उन वायरस को भी दोबारा सक्रिय कर सकता है, जो वर्षों से चुपचाप निष्क्रिय पड़े थे। यानी कोविड का हमला केवल अपने संक्रमण तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि वह शरीर के अंदर पहले से मौजूद कुछ पुराने वायरस को फिर सक्रिय होने का मौका दे सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह प्रक्रिया बीमारी को और गंभीर बनाने तथा कुछ मरीजों में लंबे समय तक बने रहने वाले Long Covid के लक्षणों से जुड़ी हो सकती है।

1,000 से ज्यादा मरीजों की जांच, करीब आधे में मिला वायरस के दोबारा जागने का संकेत

अमेरिका की University of Texas at Austin के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने महामारी की शुरुआती लहरों के दौरान अस्पताल में भर्ती 1,000 से अधिक कोविड मरीजों के नमूनों का अध्ययन किया। रिसर्च में करीब आधे मरीजों में ऐसे सामान्य वायरस के दोबारा सक्रिय होने के प्रमाण मिले, जो संक्रमण से काफी पहले उनके शरीर में मौजूद थे लेकिन निष्क्रिय अवस्था में पड़े थे। यह आंकड़ा इसलिए ध्यान खींचता है क्योंकि मामला किसी एक-दो मरीज में हुई असामान्य घटना का नहीं था। अगर गंभीर कोविड से जूझ रहे मरीजों के इतने बड़े हिस्से में latent यानी निष्क्रिय वायरस के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं, तो वैज्ञानिकों के सामने सवाल है कि क्या कोविड के दौरान शरीर और प्रतिरक्षा तंत्र पर पड़ने वाला दबाव इन वायरस को दोबारा सिर उठाने का अवसर देता है।

हमारे शरीर में वायरस वर्षों तक ‘सोए’ कैसे रह सकते हैं?

यह सुनकर हैरानी हो सकती है कि किसी इंसान के शरीर में वायरस मौजूद हो और उसे बीमारी का पता तक न चले, लेकिन विज्ञान में यह कोई नई बात नहीं है। कुछ वायरस एक बार शरीर में प्रवेश करने के बाद पूरी तरह खत्म होने के बजाय निष्क्रिय अवस्था में रह सकते हैं। प्रतिरक्षा तंत्र उन्हें नियंत्रण में रखता है और व्यक्ति सामान्य जीवन जीता रहता है। समस्या तब हो सकती है जब बीमारी, शारीरिक तनाव या प्रतिरक्षा व्यवस्था में बदलाव के कारण इन वायरस को फिर सक्रिय होने का मौका मिले। नई स्टडी इसी प्रक्रिया को गंभीर कोविड के संदर्भ में देखती है। इसका अर्थ यह नहीं कि हर कोविड मरीज के शरीर में पुराने वायरस निश्चित रूप से जाग जाएंगे, बल्कि अध्ययन एक ऐसे संबंध की ओर इशारा करता है जिसकी वैज्ञानिकों को आगे और गहराई से जांच करनी होगी।

Epstein-Barr Virus भी मिला—बेहद आम है यह संक्रमण

शोधकर्ताओं को जिन वायरस के दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले, उनमें herpes परिवार का Epstein-Barr Virus यानी EBV भी शामिल है। यह वही वायरस है जो infectious mononucleosis या ‘glandular fever’ का कारण बन सकता है। EBV बेहद आम वायरस है और एक बार संक्रमण होने के बाद यह शरीर में निष्क्रिय अवस्था में बना रह सकता है। इसलिए कोविड मरीजों में इसके reactivation यानी दोबारा सक्रिय होने का संकेत वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है। खासकर इसलिए क्योंकि Long Covid को समझने की कोशिश में वैज्ञानिक पहले भी प्रतिरक्षा तंत्र, लगातार सूजन और latent virus reactivation जैसे कई संभावित कारणों की जांच करते रहे हैं। हालांकि किसी संबंध का मिलना अपने आप यह साबित नहीं करता कि EBV ही Long Covid का कारण है।

CMV भी दोबारा सक्रिय—स्वस्थ लोगों में अक्सर नहीं देता बड़ी परेशानी

स्टडी में Cytomegalovirus यानी CMV के सक्रिय होने के संकेत भी मिले। CMV भी herpes virus परिवार का हिस्सा है और बहुत से लोगों में संक्रमण के बावजूद कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह अक्सर गंभीर समस्या नहीं बनता, लेकिन कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों और नवजात शिशुओं में यह गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है। कोविड के दौरान CMV का दोबारा सक्रिय होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि गंभीर संक्रमण के दौरान शरीर का immune system किस तरह प्रभावित होता है और क्या एक साथ कई वायरल गतिविधियां मरीज की हालत पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।

ऐसे वायरस भी सक्रिय हुए जिन्हें सामान्यतः नुकसानदेह नहीं माना जाता

रिसर्च में anelloviruses नाम के वायरस समूह की गतिविधि भी सामने आई। ये वायरस इंसानों में काफी व्यापक रूप से पाए जाते हैं और सामान्यतः इन्हें गंभीर बीमारी पैदा करने वाला नहीं माना जाता। यह खोज इसलिए दिलचस्प है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि कोविड के दौरान बदलाव केवल किसी एक खास खतरनाक वायरस तक सीमित नहीं हो सकते। गंभीर संक्रमण शरीर के भीतर मौजूद पूरे वायरल वातावरण को प्रभावित कर सकता है। वैज्ञानिक इसी जटिल संबंध को समझने की कोशिश कर रहे हैं—SARS-CoV-2 से लड़ते समय प्रतिरक्षा तंत्र में ऐसा क्या बदलता है कि पहले दबे हुए दूसरे वायरस को फिर सक्रिय होने का मौका मिल सकता है?

सबसे चौंकाने वाली बात—सिर्फ कमजोर इम्युनिटी वालों तक सीमित नहीं दिखा असर

अध्ययन की महत्वपूर्ण बातों में यह भी शामिल है कि viral reactivation केवल पहले से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीजों तक सीमित नहीं दिखाई दिया। अन्यथा सामान्य immune system वाले लोगों में भी वायरस के दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले। यह बात कोविड के असर को और जटिल बनाती है। हालांकि यहां सावधानी जरूरी है—इसका अर्थ यह नहीं है कि स्वस्थ व्यक्ति को कोविड होते ही उसके शरीर के सभी पुराने वायरस सक्रिय हो जाएंगे। अध्ययन अस्पताल में भर्ती मरीजों पर केंद्रित था, इसलिए इसके निष्कर्षों को हल्के संक्रमण वाले हर व्यक्ति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

क्या यही Long Covid की एक वजह है? अभी जवाब ‘संभव’, लेकिन ‘साबित’ नहीं

इस रिसर्च का सबसे बड़ा सवाल Long Covid से जुड़ा है। कोविड संक्रमण खत्म होने के बाद भी कुछ लोगों में थकान, सांस लेने में परेशानी, ध्यान और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं तथा दूसरे लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं। वैज्ञानिक वर्षों से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है। नई स्टडी latent viruses के reactivation को इस पहेली के एक संभावित हिस्से के रूप में सामने रखती है। लेकिन यहां सनसनी से बचना जरूरी है। अभी यह कहना सही नहीं होगा कि पुराने वायरस का जागना ही Long Covid का कारण है। शोध से संबंध के संकेत मिल सकते हैं, लेकिन कारण साबित करने के लिए और अध्ययन की जरूरत होती है।

कोविड शरीर को अकेले नहीं, पूरी प्रतिरक्षा व्यवस्था को चुनौती दे सकता है

इस अध्ययन का व्यापक संदेश यही है कि कोविड को केवल फेफड़ों या SARS-CoV-2 के सीधे हमले तक सीमित करके समझना अधूरा हो सकता है। गंभीर संक्रमण के दौरान शरीर की प्रतिरक्षा व्यवस्था बड़े दबाव से गुजरती है। अगर उसी समय पहले से दबे वायरस सक्रिय हो जाएं तो डॉक्टरों के सामने बीमारी की तस्वीर और जटिल हो सकती है। इससे यह समझने में भी मदद मिल सकती है कि एक ही उम्र और लगभग समान स्वास्थ्य वाले दो लोगों में कोविड का असर इतना अलग क्यों दिखाई दे सकता है। हालांकि बीमारी की गंभीरता के पीछे उम्र, पहले से मौजूद बीमारियां, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और कई दूसरे कारण भी महत्वपूर्ण होते हैं।

घबराने की नहीं, Covid के लंबे असर को गंभीरता से समझने की जरूरत

इस स्टडी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कोविड हो चुका हर व्यक्ति अब अपने शरीर में ‘सोए वायरस’ को लेकर डरने लगे या बिना चिकित्सकीय सलाह के जांच और दवाएं शुरू कर दे। खास तौर पर यह रिसर्च महामारी की शुरुआती लहरों में अस्पताल में भर्ती मरीजों के नमूनों पर आधारित है। आज की आबादी में टीकाकरण, पहले हुए संक्रमण, वायरस के बदलते स्वरूप और इलाज के तरीकों के कारण परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। इसलिए इन नतीजों को मौजूदा हर कोविड संक्रमण पर सीधे लागू करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।

नई स्टडी ने Covid की पुरानी पहेली में जोड़ा एक अहम टुकड़ा

कोरोना महामारी ने बार-बार दिखाया है कि यह बीमारी शुरुआत में जितनी सीधी दिखाई देती थी, असल में उससे कहीं अधिक जटिल है। नई रिसर्च अब उस जटिलता की एक और परत खोलती है—गंभीर Covid-19 संभवतः केवल SARS-CoV-2 से लड़ाई नहीं है; कुछ मरीजों में वह शरीर में वर्षों से शांत पड़े दूसरे वायरस को भी दोबारा सक्रिय होने का मौका दे सकता है। अब वैज्ञानिकों के सामने अगला बड़ा काम यह पता लगाना है कि यह reactivation केवल गंभीर बीमारी का नतीजा है या खुद बीमारी को और गंभीर बनाता है, और Long Covid में इसकी वास्तविक भूमिका कितनी है। इन सवालों के ठोस जवाब ही तय करेंगे कि भविष्य में कोविड और उसके लंबे असर के इलाज में इस खोज की कितनी बड़ी भूमिका होगी।

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