अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान | 10 मई 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्ताव पर अपना आधिकारिक जवाब पाकिस्तान को सौंप दिया है, जो इस पूरे विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इसकी पुष्टि की है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की ओर से भेजे गए प्रस्ताव का उद्देश्य क्षेत्र में जारी संघर्ष को रोकना और बातचीत के जरिए स्थायी समाधान तलाशना है। ईरान ने अपने जवाब में साफ किया है कि किसी भी बातचीत की पहली प्राथमिकता युद्ध और सैन्य कार्रवाई को रोकना होना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान पिछले कई हफ्तों से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस दौरान इस्लामाबाद ने दोनों देशों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान और संभावित समझौते के प्रारूप को आगे बढ़ाने की कोशिश की है।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी प्रस्ताव में संघर्ष विराम, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और आगे व्यापक वार्ता की रूपरेखा जैसे मुद्दे शामिल हैं। वहीं ईरान ने अपने जवाब में राष्ट्रीय हितों, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर अपनी शर्तें दोहराई हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं होता। उन्होंने कहा था कि ईरान अपनी जनता के अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा पूरी ताकत से करेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि तेहरान किसी भी समझौते में अपनी रणनीतिक स्थिति कमजोर नहीं होने देना चाहता।
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है और यहां तनाव बढ़ने से तेल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत आगे बढ़ती है और संघर्ष कम होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान की मध्यस्थता इस पूरे संकट में बेहद अहम बन चुकी है। पाकिस्तान न केवल अमेरिका और ईरान दोनों से संपर्क बनाए हुए है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए सऊदी अरब, कतर और अन्य देशों के साथ भी लगातार संवाद कर रहा है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के जवाब पर अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध और कूटनीति अब साथ-साथ चल रहे हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह वार्ता स्थायी शांति की दिशा में बढ़ती है या फिर क्षेत्र एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा।




