अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 21 अप्रैल 2026
नेपाल में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर को देखते हुए अब डेटा सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। UNESCO और IIEP ने मिलकर नेपाल सरकार को इस दिशा में सहयोग देने की पहल की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नेपाल में जलवायु से जुड़े आंकड़ों (डेटा) को बेहतर बनाना है, ताकि भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से जुड़े बदलावों का सही अनुमान लगाया जा सके। नेपाल जैसे पहाड़ी देश में बाढ़, भूस्खलन और अनियमित बारिश जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में सही और सटीक डेटा बहुत जरूरी हो जाता है।
इस कार्यक्रम के तहत सरकार के विभिन्न विभागों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे अधिकारी बेहतर तरीके से डेटा इकट्ठा कर सकेंगे और उसका विश्लेषण भी कर पाएंगे। आसान शब्दों में कहें तो अब मौसम और जलवायु से जुड़ी जानकारी ज्यादा व्यवस्थित और भरोसेमंद तरीके से उपलब्ध होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत डेटा सिस्टम से सरकार को नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। जैसे कि कहां बाढ़ का खतरा ज्यादा है, किस इलाके में सूखा पड़ सकता है या किन जगहों पर खेती पर असर पड़ेगा—इन सबका पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा। इससे लोगों को समय रहते चेतावनी देना भी आसान होगा।
नेपाल सरकार ने भी इस पहल का स्वागत किया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल आपदा प्रबंधन मजबूत होगा, बल्कि शिक्षा और योजना बनाने के क्षेत्र में भी सुधार आएगा। खासतौर पर स्कूलों और संस्थानों में जलवायु शिक्षा को भी बेहतर किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी इस चुनौती को समझ सके।
इस पहल में स्थानीय स्तर पर भी काम किया जाएगा। यानी गांव और शहर दोनों जगहों से डेटा इकट्ठा करने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इससे जमीन से जुड़ी सही जानकारी सामने आएगी और योजनाएं भी उसी के अनुसार बनाई जा सकेंगी। UNESCO और IIEP की यह पहल नेपाल के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले समय में इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।




