महेंद्र कुमार | नई दिल्ली 29 दिसंबर 2025
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि सिर्फ असम की ही नहीं देश के हर कोने से बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान की जाएगी। उनका कहना है देश के संसाधनों पर पहला हक देशवासियों का है घुसपैठियों और बांग्लादेशियों का नहीं। यह बात सुनने में बहुत अच्छी लग रही है। लेकिन सवाल ये है कि इस तरह की घोषणा तो पिछले 11 वर्षों से हो रही है। दूसरी बात ये कि सरकार जब बीजेपी की है तो पिछले 11 साल से सरकार को ऐसा करने से कौन रोक रहा है? आंकड़े बताते हैं कि घुसपैठ मोदी सरकार में बढ़ी है। वापस लौटाए जाने वाले घुसपैठियों के आंकड़े भी देखें तो मनमोहन सिंह सरकार ने मोदी सरकार से अधिक घुसपैठियों को देश से निकाला था। सवाल यह भी उठता है कि घुसपैठिए कोई राज्यों की कमियों की वजह से नहीं देश में आते हैं। बोर्डर क्रॉस कर के कोई अगर घुसपैठ कर रहा है तो वो सीधे तौर पर गृहमंत्रालय की नाकामी की है क्योंकि सेना के सभी अंग गृहमंत्रालय के तहत ही आते हैं।
नरेंद्र मोदी सरकार की एक बहुत खास बात है। काम हो ये जरूरी नहीं लेकिन काम की बात करते हुए, बड़ी बड़ी घोषणाएं करते हुए दिखना चाहिए। बात बात में एक कोई चेतावनी संदेश बन के आ जाती है। और जब कुछ नहीं हो तो पुराने नाम बदल कर नए नाम की घोषणा ही शुरू कर दी जाती है और हर किसी को इसी काम में लगा दिया जाता है कि जो कदम उठाया गया है उसको जस्टिफाई किया जाए। और फिर सरकार से लेकर सोशल मीडिया तक पर, टीवी खबरों से लेकर सोशल मीडिया की टीम झोंक दी जाती है। इसी क्रम में अब नया टास्क या ये कहें कि नई घोषणा फिर से कर दी गई है।
अब इसी कड़ी का परिणाम है जो अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ की वजह से कई राज्यों में सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा है और स्थानीय लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। सरकार का मकसद किसी को डराना नहीं, कानून के तहत सही पहचान करना और व्यवस्था को मजबूत बनाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस प्रक्रिया में संविधान और मानवीय मूल्यों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि असम में पहले से चल रही पहचान और सत्यापन प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और उसी तर्ज़ पर देश के दूसरे हिस्सों में भी काम किया जाएगा। सरकार का कहना है कि जो लोग कानूनी तरीके से भारत में रहते हैं, उन्हें किसी तरह की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार समर्थक इसे देश की सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़ा ज़रूरी कदम बता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और सियासत दोनों में चर्चा और तेज होने की संभावना है।




