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इंदौर दूषित पानी कांड: स्वच्छतम शहर में गंदा पानी जानलेवा कैसा बना? इंजीनियर हर एंगल से जांच में जुटे

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परवेज खान | इंदौर 4 जनवरी 2026

वह शहर जिसे स्वच्छतम शहर के रूप में सात बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया, अब अपने ही नागरिकों की जान पर संकट बनकर खड़ा है। मध्य प्रदेश के भागीरथपुरा इलाके में पिछले दिनों पीने के पानी में अचानक भयानक गंदगी आ गई, जिसने केवल उल्टी-दस्त नहीं कराया बल्कि कम से कम 10 लोगों की मौत और सैकड़ों की तबीयत खराब कर दी। इस त्रासदी ने न केवल आम लोगों को हिला दिया है, बल्कि प्रशासन के भीतर बड़े स्तर पर चौंकाने वाले प्रश्न भी खड़े कर दिए हैं कि आखिर “स्वच्छ शहर” की चमकदार छवि के पीछे ऐसा क्या छिपा था। अब इंजीनियरों और अधिकारियों की टीम हर संभव एंगल से जांच में जुट गई है — केवल पाइपलाइन लीकेज या सीवेज मिलावट तक सीमित नहीं, बल्कि पुरानी बुनियादी ढांचे, भूजल गुणवत्ता, निगरानी तंत्र और पाइपलाइन ड्रेनेज नेटवर्क तक की पड़ताल की जा रही है कि गंदा पानी कैसे और क्यों नागरिकों के नलों में पहुँचा।

1. पानी दूषित हुआ कैसे? पास से मिला ‘सीवेज’ मिलावट का निशान

शुरुआती जांचों में यह सामने आया है कि भागीरथपुरा के मुख्य पीने के पानी की लाइनों में सीवेज के मिल जाने की संभावना सबसे प्रबल कारण है। स्थानीय पुलिस चौकी के नीचे से गुजरती मुख्य पाइपलाइन के आसपास एक टॉयलेट के सीवेज सिस्टम का ठीक से निर्माण न होने का संकेत मिला है — जिसके कारण मल-जल सीधे पानी की लाइनों में घुस गया।

2. इंजीनियर हर एंगल से जांच कर रहे हैं

सरकारी इंजीनियरों की टीम ने केवल उस एक पाइपलाइन लीकेज तक सीमित नहीं रखा है। वे पुरानी और नयी दोनों नेटवर्कों, नर्मदा जल आपूर्ति लाइनों, स्थानीय बोरवेल्स, सैंपलिंग रिपोर्ट, और माइक्रोबियल तथा रसायनिक टेस्टिंग पर भी काम कर रहे हैं। 70 से अधिक पानी के नमूने लिए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि दूषण कहाँ से शुरू हुआ और कितनी दूरी तक फैल चुका है।

3. मौतें और स्वास्थ्य संकट

दूषित पानी से कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 1400 से अधिक लोग उल्टी-दस्त, बुखार और पेट की बीमारियों के साथ अस्पतालों में भर्ती हैं। खासकर बुज़ुर्ग और छोटे बच्चों पर इसका प्रभाव तीव्र रहा है, जिससे स्थानीय चिकित्सा केंद्रों पर दबाव बढ़ गया है।

4. प्रशासन की कार्रवाई और आलोचना

मुख्यमंत्री कार्यालय ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया है और नगर निगम कमिश्नर का ट्रांसफर कर दिया गया है। विपक्ष और नागरिक संगठनों ने प्रशासन पर लापरवाही और चेतावनी न मानने की कड़ी आलोचना की है, यह बताते हुए कि पहले भी भूजल जांच रिपोर्टों में मिसालें मिली हुई थीं जिन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया।

5. सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी और राहत उपाय

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को उबला हुआ पानी पीने, ORS और साफ सफाई पर जोर दिया है। कई क्षेत्रों में फिल्टर टैंकर की आपूर्ति शुरू की गई है और अस्पतालों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं। नागरिकों को संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लगातार दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

इंदौर का यह पानी-दूषण कांड प्रशासनिक लापरवाही, खराब बुनियादी ढांचे और निगरानी तंत्र की कमजोरियों का दर्दनाक नमूना है। इंजीनियरों और विशेषज्ञों की विस्तृत जांच यह सुनिश्चित करेगी कि सिर्फ एक बदनाम घटना न रह जाए, बल्कि भविष्य में इसे रोकने के लिये स्थाई समाधान और जवाबदेही तय की जाए।

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