राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 अक्टूबर 2026
भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में चल रही संवेदनशील परिस्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने काठमांडू में भारत के अगले राजदूत के लिए वरिष्ठ करियर राजनयिक सुधाकर डालेला का नाम आगे बढ़ाया है। विदेश मंत्रालय में सचिव (Economic Relations) के पद पर कार्यरत डालेला का नाम नेपाल सरकार को भेजा जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नई दिल्ली काठमांडू के साथ अपने रिश्तों को कितना महत्वपूर्ण और संवेदनशील मान रही है। The Hindu के अनुसार, भारत की ओर से डालेला के नाम का प्रस्ताव 6 अक्टूबर 2026 को काठमांडू भेजा गया और नेपाल सरकार से इसकी मंजूरी जल्द मिलने की उम्मीद है।
सुधाकर डालेला विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को संभालने का लंबा अनुभव रखते हैं। उन्होंने विदेश मंत्रालय के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में भी पड़ोसी देशों से जुड़े मामलों पर काम किया है। इसके अलावा वह भूटान में भारत के राजदूत भी रह चुके हैं। यानी नेपाल के लिए उनका चयन ऐसे अधिकारी के तौर पर हुआ है, जिन्हें हिमालयी पड़ोस और भारत की क्षेत्रीय कूटनीति की जमीनी और नीतिगत दोनों स्तरों पर समझ है।
डालेला की नियुक्ति की एक खास बात उनका प्रशासनिक और राजनयिक स्तर भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, काठमांडू में भारत के पिछले कुछ राजदूत अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी रहे हैं, जबकि डालेला विदेश मंत्रालय में सचिव स्तर के अधिकारी हैं। ऐसे में उनका नाम भेजा जाना भारत की ओर से नेपाल को दिए जा रहे महत्व का संकेत माना जा रहा है। हालांकि अंतिम नियुक्ति नेपाल सरकार की सहमति के बाद ही आगे बढ़ेगी।
भारत-नेपाल संबंध ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहद गहरे हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा, लोगों की आवाजाही, व्यापार, रोजगार, सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंधों की लंबी परंपरा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में रिश्तों में कई संवेदनशील मुद्दे भी सामने आए हैं। सीमा से जुड़े सवालों, राजनीतिक घटनाक्रम और नेपाल की बदलती घरेलू राजनीति ने दोनों देशों के रिश्तों को अधिक जटिल बनाया है। ऐसे माहौल में काठमांडू में राजदूत की भूमिका केवल औपचारिक राजनयिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दोनों सरकारों के बीच संवाद को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण होती है।
नेपाल में बालेन शाह सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत के सामने काठमांडू के साथ रिश्तों को नए राजनीतिक समीकरणों के बीच संभालने की चुनौती है। ऐसे में किसी राजनीतिक नियुक्ति के बजाय अनुभवी करियर डिप्लोमैट को भेजने का फैसला भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत देता है। डालेला का प्रशासनिक अनुभव उन्हें नेपाल के साथ राजनीतिक संवाद के साथ-साथ आर्थिक, सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दों पर भी काम करने में मदद कर सकता है।
भारत के लिए नेपाल केवल एक पड़ोसी देश नहीं है। दोनों देशों की लगभग खुली सीमा और गहरे जनसंपर्क के कारण नेपाल में होने वाला राजनीतिक बदलाव सीधे भारत के सीमावर्ती राज्यों और व्यापक सुरक्षा हितों से जुड़ता है। दूसरी ओर नेपाल भी भारत के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति में है। इसलिए दोनों देशों के बीच संवाद का निरंतर बना रहना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है।
ऐसे समय में सुधाकर डालेला का नाम आगे बढ़ाया जाना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि नई दिल्ली काठमांडू के साथ रिश्तों को संभालने के लिए अनुभव और संस्थागत समझ वाले अधिकारी को प्राथमिकता दे रही है। अब निगाहें नेपाल सरकार की औपचारिक मंजूरी पर हैं। मंजूरी मिलने के बाद डालेला के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—बदलते राजनीतिक माहौल के बीच भारत-नेपाल संवाद को मजबूत करना, पुराने मतभेदों पर बातचीत आगे बढ़ाना और दोनों देशों के रणनीतिक हितों के बीच संतुलन कायम करना।



