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ब्रिक्स मंच पर भारत की सक्रिय कूटनीति: डोभाल ने ईरान-चीन के शीर्ष अधिकारियों से की अहम बातचीत

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 23 जून 2026

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की रणनीतिक सक्रियता

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी सक्रिय कूटनीतिक भूमिका का संकेत दिया है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक के दौरान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ईरान, चीन और ब्राजील समेत कई देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग प्रमुख मुद्दे रहे।

ईरान के साथ पश्चिम एशिया पर विस्तृत चर्चा

अजीत डोभाल ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के उप सचिव गादिर नेजामीपोर से मुलाकात कर पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की। विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, ईरान-अमेरिका वार्ता और भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। साथ ही ब्रिक्स मंच के भीतर सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई गई।

भारत के लिए ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार रहा है, विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह और मध्य एशिया तक पहुंच के संदर्भ में। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, यह बैठक विशेष महत्व रखती है।

भारत-चीन संबंधों में सामान्यीकरण की ओर संकेत

ब्रिक्स बैठक के दौरान अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से भी मुलाकात की। विदेश मंत्रालय ने इस बातचीत को “भविष्य उन्मुख” बताया। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में हालिया प्रगति की समीक्षा की और संबंधों के “धीरे-धीरे सामान्य होने” की दिशा में बढ़ रहे प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया।

डोभाल ने इस दौरान स्पष्ट किया कि भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमेय और रचनात्मक संबंध न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी आवश्यक हैं। पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण तनावपूर्ण रहे संबंधों में यह संवाद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

ब्रिक्स मंच की बढ़ती वैश्विक भूमिका

ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। भारत, चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका तथा नए सदस्य देशों के साथ विस्तारित ब्रिक्स अब वैश्विक शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित यह बैठक वैश्विक सुरक्षा ढांचे, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित रही।

भारत का संदेश: संवाद ही समाधान का रास्ता

ब्रिक्स बैठक के दौरान हुई ये उच्चस्तरीय मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि भारत पश्चिम एशिया से लेकर इंडो-पैसिफिक तक सभी प्रमुख भू-राजनीतिक मुद्दों पर संतुलित और सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। ईरान और चीन दोनों के साथ समानांतर संवाद यह दर्शाता है कि नई दिल्ली अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक रास्तों को प्राथमिकता दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट, भारत-चीन संबंधों और ब्रिक्स के बढ़ते प्रभाव के बीच नई दिल्ली की यह कूटनीतिक सक्रियता आने वाले महीनों में क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

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