राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/बीजिंग | 26 अगस्त 2026
भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिशों को आगे बढ़ाते हुए दोनों देशों ने 2027 में विशेष प्रतिनिधियों की 26वीं बैठक भारत में आयोजित करने पर सहमति जताई है। यह फैसला बीजिंग में हुई 25वीं विशेष प्रतिनिधि बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री एवं विशेष प्रतिनिधि वांग यी ने बातचीत की।
इस फैसले को भारत-चीन संबंधों में जारी कूटनीतिक सुधार की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों ने सीमा विवाद पर बातचीत जारी रखने और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
सीमा विवाद पर बातचीत आगे बढ़ाने पर जोर
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण से जुड़ी बातचीत को आगे बढ़ाने, सीमा प्रबंधन को मजबूत करने और मौजूदा संस्थागत तंत्र को बेहतर बनाने पर विस्तार से चर्चा की।
भारत और चीन ने 2005 में तय किए गए राजनीतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर सीमा विवाद का न्यायसंगत, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता दोहराई।
दोनों देशों का कहना है कि सीमा से जुड़े मतभेदों को बातचीत और परामर्श के जरिए संभाला जाना चाहिए, ताकि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहे।
डोभाल बोले- भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार
बैठक के दौरान अजीत डोभाल ने भारत और चीन के संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश मूल रूप से साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं।
डोभाल के मुताबिक भारत और चीन दोनों प्राचीन सभ्यताएं, बड़ी आबादी वाले देश और महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाएं हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच स्थिर, पूर्वानुमेय और सकारात्मक संबंध केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के मार्गदर्शन में भारत-चीन संबंध फिर सकारात्मक दिशा में लौटे हैं। सीमा क्षेत्रों में व्यापक रूप से शांति बनी हुई है और विभिन्न क्षेत्रों में संपर्क तथा सहयोग धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।
भारत ने चीन के साथ रणनीतिक संवाद मजबूत करने, आपसी हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय को गहरा करने की इच्छा भी जताई।
वांग यी ने भी रिश्ते सुधारने पर दिया जोर
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत को चीन का महत्वपूर्ण पड़ोसी और प्रमुख विकासशील देश बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच स्वस्थ और स्थिर संबंध दोनों देशों की जनता के मूल हित में हैं।
वांग यी ने कहा कि चीन-भारत संबंधों का प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक वैश्विक और रणनीतिक महत्व है।
उन्होंने भारत और चीन से रिश्तों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से देखने की अपील की। वांग यी ने कहा कि दोनों देशों को संवाद बढ़ाने, आपसी समझ मजबूत करने, मतभेदों को उचित तरीके से संभालने और सहयोग की संभावनाओं को तलाशने की जरूरत है।
उन्होंने भारत और चीन के संबंधों को ‘ड्रैगन और हाथी’ के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में आगे बढ़ाने की बात भी कही।
हान झेंग से भी मिले डोभाल
बीजिंग यात्रा के दौरान अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की। दोनों के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
भारतीय दूतावास के अनुसार, बातचीत में आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मुद्दे भी शामिल रहे।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पिछले कुछ वर्षों में हुई मुलाकातों के बाद दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं।
2027 की बैठक क्यों अहम?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बेहद संवेदनशील मुद्दा है। ऐसे में विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता का जारी रहना अपने आप में महत्वपूर्ण है। 2027 में 26वीं बैठक भारत में आयोजित करने का फैसला यह संकेत देता है कि दोनों देश सीमा विवाद को बातचीत के संस्थागत रास्ते से आगे बढ़ाना चाहते हैं।
हालांकि, सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी दूर है। लेकिन लगातार संवाद, सीमा प्रबंधन में सुधार और सैन्य तनाव को नियंत्रित रखना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत और चीन अपने मतभेदों को टकराव में बदलने के बजाय बातचीत के जरिए संभालने की कोशिश कर रहे हैं। 2027 में भारत में होने वाली अगली विशेष प्रतिनिधि बैठक इस प्रक्रिया की अगली बड़ी परीक्षा होगी।




