अर्थव्यवस्था/ व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 21 सितंबर 2026
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA को अब औपचारिक मंजूरी मिल गई है। दोनों देशों ने सोमवार, 21 सितंबर को समझौते के दस्तावेजों का औपचारिक आदान-प्रदान किया। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह समझौता 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो जाएगा। इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।
भारत और न्यूजीलैंड ने इस FTA पर 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षर किए थे। उस समय दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इसे व्यापार, निवेश और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था। अब दोनों देशों की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद समझौते के लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।
समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि न्यूजीलैंड भारत से आयात होने वाले सभी सामान पर मौजूदा टैरिफ खत्म करेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय उत्पादों को पहले की तुलना में अधिक अनुकूल व्यापारिक परिस्थितियां मिलेंगी। इससे भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
दूसरी ओर भारत न्यूजीलैंड से आने वाले मौजूदा आयातों में से 95 प्रतिशत पर टैरिफ को हटाएगा या कम करेगा। यानी दोनों देशों ने अपने-अपने बाजारों में बड़ी संख्या में वस्तुओं के लिए शुल्क में कटौती का रास्ता खोला है। हालांकि दोनों देशों की ओर से शुल्क में कमी और समाप्ति अलग-अलग उत्पादों तथा तय प्रावधानों के अनुसार लागू होगी।
यह समझौता ऐसे समय में लागू होने जा रहा है जब भारत अपनी वैश्विक व्यापार साझेदारियों को विस्तार देने पर जोर दे रहा है। अलग-अलग देशों के साथ FTA के जरिए भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और निर्यात के नए अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है। न्यूजीलैंड के साथ समझौता भी इसी व्यापक व्यापार रणनीति का हिस्सा है।
भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड में टैरिफ हटना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे भारतीय उत्पादों की कीमत और प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर असर पड़ सकता है। जिन वस्तुओं पर पहले आयात शुल्क लगता था, वहां शुल्क समाप्त होने के बाद भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों और उत्पादों के अनुसार सामने आएगा।
दूसरी तरफ न्यूजीलैंड के लिए भारत के बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच का रास्ता खुल रहा है। भारत में न्यूजीलैंड से आने वाले 95 प्रतिशत मौजूदा आयातों पर टैरिफ घटने या समाप्त होने से दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा बढ़ सकता है। इससे उपभोक्ताओं, कारोबारियों और आयात-निर्यात से जुड़े क्षेत्रों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू निवेश और लोगों के बीच संपर्क से भी जुड़ा है। अप्रैल में FTA पर हस्ताक्षर के समय दोनों देशों ने व्यापार के साथ-साथ निवेश और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया था। ऐसे में यह समझौता केवल सामान के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि दोनों देशों के व्यापक आर्थिक संबंधों के लिए एक ढांचा तैयार करता है।
सोमवार को न्यूजीलैंड की संसद में न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले और भारत की न्यूजीलैंड में हाई कमिश्नर मुआनपुई सैआवी के बीच औपचारिक दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ। इसके साथ ही 27 अप्रैल को हस्ताक्षरित समझौते के लागू होने की अंतिम प्रक्रिया भी पूरी हो गई।
अब सबकी नजर 20 अक्टूबर पर है, जब भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह FTA औपचारिक रूप से लागू होगा। एक तरफ भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड में बिना टैरिफ के प्रवेश का व्यापक अवसर मिलेगा, तो दूसरी तरफ न्यूजीलैंड के उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में शुल्क घटेगा। आने वाले महीनों में इस समझौते का असली असर दोनों देशों के व्यापार आंकड़ों, निर्यात और कारोबारियों की गतिविधियों में दिखाई देगा।



