अंतरराष्ट्रीय डेस्क 2 दिसंबर 2025
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर देश-दुनिया में पिछले कुछ हफ्तों से जो रहस्य और सस्पेंस बना हुआ था, वह आखिरकार टूट गया है। सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी अफवाहें फैल रही थीं कि खान की तबीयत बेहद खराब है, वह बेहोश हैं, या यहां तक कि उनकी मौत हो चुकी है। दुनिया भर में चिंताओं का माहौल था, लेकिन सरकार और जेल प्रशासन की चुप्पी ने इन आशंकाओं को और गहरा कर दिया। इसी बीच एक अहम घटनाक्रम हुआ जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी—सरकार ने खान की बहन उज़्मा खानुम को Adiala Jail में उनसे मिलने की अनुमति दे दी।
उज़्मा खानुम, जो पेशे से चिकित्सक हैं, ने जेल में अपने भाई से मुलाकात की और बाहर निकलते ही मीडिया से कहा कि “इमरान खान जिंदा हैं, पूरी तरह होश में हैं और उनकी तबीयत सामान्य है।” उनकी यह बात उन तमाम अंतरराष्ट्रीय स्तर की अफवाहों को खत्म करने के लिए काफी थी। लेकिन इसी के साथ उन्होंने एक और गंभीर आरोप लगाया—उन्होंने कहा कि उनके भाई पर “मानसिक टॉर्चर” किया जा रहा है, उन्हें राजनीतिक रूप से अलग-थलग रखा जा रहा है और ऐसा माहौल बनाया गया है जिससे उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
बहन की यह मुलाकात सिर्फ एक पारिवारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक भूचाल भी साबित हुई। विपक्षी पार्टी PTI ने इसे सरकार की “मजबूरी” बताया और कहा कि देश भर में बढ़ते दबाव, विरोध और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता के चलते सरकार को परिवार से मुलाकात की अनुमति देनी पड़ी। खान की कानूनी टीम भी लगातार यह आरोप लगाती रही है कि सरकार जानबूझकर मुलाकातें रोक रही थी ताकि किसी को उनके वास्तविक हालात पता न चल सकें।
इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच यह मुलाकात कई सवाल भी छोड़ गई है। विपक्ष का कहना है कि यदि खान सच में स्वस्थ थे, तो महीनों तक परिवार को मिलने से क्यों रोका गया? उनकी आवाज़ को जनता तक क्यों नहीं पहुंचने दिया गया? क्या सरकार राजनीतिक स्थिरता के नाम पर मानवाधिकारों का दमन कर रही है? वहीं जेल प्रबंधन ने दावा किया है कि खान की स्थिति ‘ठीक’ है और उन्हें हर जरूरी सुविधा दी जा रही है।
उधर, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी यह मुद्दा गंभीरता से उठने लगा था। Khan के बेटों ने भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया से अपनी चिंता जताई थी कि उन्हें अपने पिता की सुरक्षा और सेहत को लेकर डर है। इस संदर्भ में बहन की मुलाकात ने खान की जीवित-अवस्था पर तो मुहर लगा दी, लेकिन सरकार पर उठे संदेह और आरोपों की आग को और भड़का दिया है।
अब पूरा पाकिस्तान और वैश्विक राजनीतिक समुदाय इस बात पर निगाहें गड़ाए हुए है कि आने वाले दिनों में क्या इमरान खान को अधिक पारदर्शिता, नियमित मुलाकातें और चिकित्सा जांच की अनुमति मिलेगी या फिर यह मुलाकात एक बार की राहत भर थी? PTI का कहना है कि यदि सरकार ने पूरी पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो वह देशव्यापी आंदोलन शुरू करने को तैयार है।
कुल मिलाकर, यह मुलाकात भले ही “इमरान खान जिंदा हैं और सुरक्षित हैं” का सत्य सामने लाती है, लेकिन सत्ता प्रतिष्ठान पर उठने वाले सवालों और मानवाधिकारों की बहस को और तेज कर गई है।




