[the_ad id="179"]
Home » National » UCC बैकडोर से नहीं, संसद में कानून बनाकर लागू करें: उमर अब्दुल्ला

UCC बैकडोर से नहीं, संसद में कानून बनाकर लागू करें: उमर अब्दुल्ला

राष्ट्रीय/ राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | श्रीनगर | 15 सितंबर 2026

यूसीसी पर अब सीधे संसद की लड़ाई की मांग

समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर राजनीतिक टकराव तेज होता जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले एनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के ऐलान के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने BJP पर सीधा निशाना साधा है। उमर ने कहा कि अगर केंद्र सरकार के पास यूसीसी लागू करने के लिए पर्याप्त संख्या है, तो उसे संसद में विधेयक लाकर कानून बनाना चाहिए, अलग-अलग BJP शासित राज्यों के जरिए इसे लागू करने का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए।

‘बैकडोर रूट क्यों?’—उमर का सीधा सवाल

उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार यूसीसी के लिए “बैकडोर एंट्री” का रास्ता क्यों अपना रही है। उनका कहना है कि अगर सरकार के पास संसद में पर्याप्त संख्या है तो वह सीधे संसद में विधेयक लेकर आए और उस पर बहस कराए। उन्होंने सवाल किया—“आपके पास संख्या है तो संसद में लेकर आइए, अलग-अलग राज्यों के जरिए ऐसा क्यों कर रहे हैं?”
यानी उमर का मूल सवाल यूसीसी के विचार से ज्यादा उसके तरीके और राजनीतिक प्रक्रिया को लेकर है।

राज्यों के जरिए लागू करने की रणनीति पर सवाल

BJP के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा है कि एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा। इसके बाद सवाल यह उठ रहा है कि जब विवाह, तलाक, विरासत और परिवार से जुड़े नागरिक कानूनों में समानता की बात की जा रही है, तो क्या अलग-अलग राज्य अपने स्तर पर अलग-अलग कानून बनाकर इस दिशा में आगे बढ़ेंगे?

उमर अब्दुल्ला इसी बिंदु पर केंद्र को घेर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यूसीसी पूरे देश के लिए इतना महत्वपूर्ण कानून है, तो राष्ट्रीय स्तर पर संसद के भीतर खुली बहस और कानून बनाने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई जा रही?

एनडीए के भीतर भी उठ रहे हैं अलग-अलग सुर

यूसीसी को लेकर एनडीए के भीतर भी पूरी तरह एक जैसी तस्वीर नहीं है। टीडीपी ने अमित शाह के ऐलान का समर्थन किया है, जबकि जेडीयू ने बिहार में यूसीसी लागू करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। ऐसे में उमर अब्दुल्ला ने इस मतभेद को भी मुद्दा बनाया और कहा कि एनडीए के कई सहयोगी दल खुद यूसीसी के विचार के विरोध में रहे हैं।

यानी विपक्ष का सवाल यह भी है कि अगर एनडीए के भीतर ही इस मुद्दे पर एक राय नहीं है, तो केंद्र सरकार इसे राज्यों में किस तरह लागू करेगी?

संसद में चर्चा होगी तो हर सवाल का जवाब देना पड़ेगा

उमर के बयान के पीछे राजनीतिक संदेश साफ है। संसद में विधेयक आने पर सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना होगा, अलग-अलग समुदायों की चिंताओं पर चर्चा करनी होगी और कानून के हर प्रावधान पर बहस करनी होगी। दूसरी तरफ राज्यों के स्तर पर कानून बनाने से यह प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों में अलग तरीके से आगे बढ़ सकती है।

इसीलिए उमर का सवाल है कि अगर केंद्र सरकार यूसीसी को लेकर इतनी आश्वस्त है, तो संसद के रास्ते से क्यों नहीं आती?

यूसीसी सिर्फ कानून नहीं, बेहद संवेदनशील सामाजिक मुद्दा

समान नागरिक संहिता का संबंध नागरिकों के निजी और पारिवारिक जीवन से जुड़े कई मामलों से है। विवाह, तलाक, विरासत और दूसरे पारिवारिक मामलों में अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नियम लागू करने की बात यूसीसी के केंद्र में है। BJP इसे समानता और एक जैसे नागरिक अधिकारों से जोड़ती है, जबकि विरोध करने वाले दल और कई संगठन इसके प्रावधानों, प्रक्रिया और धार्मिक स्वतंत्रता पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाते हैं।

इसलिए यह मुद्दा केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक, संवैधानिक और राजनीतिक भी है।

उमर ने BJP के सामने रखी सीधी चुनौती

उमर अब्दुल्ला का संदेश मूल रूप से यह है कि अगर BJP और केंद्र सरकार के पास यूसीसी लागू करने के लिए पर्याप्त राजनीतिक समर्थन है, तो उसे छिपे या अप्रत्यक्ष रास्ते की जरूरत नहीं होनी चाहिए। सीधे संसद में विधेयक लाया जाए, बहस हो और वोटिंग के जरिए फैसला हो।

यह चुनौती ऐसे समय आई है जब एनडीए के भीतर भी बिहार को लेकर मतभेद सामने आ चुका है।

अब लड़ाई सिर्फ यूसीसी की नहीं, रास्ते की भी है

यूसीसी लागू होगा या नहीं, यह आने वाले समय की राजनीतिक और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। लेकिन अभी से एक बड़ा सवाल सामने आ गया है—क्या देशभर में समान नागरिक कानून लाने के लिए राज्यों के अलग-अलग रास्ते अपनाए जाएंगे या केंद्र सरकार संसद के जरिए एक व्यापक राष्ट्रीय कानून लेकर आएगी?

उमर अब्दुल्ला ने BJP से साफ शब्दों में कहा है—अगर संख्या है तो संसद में विधेयक लेकर आइए। अब सवाल BJP से है: यूसीसी को लेकर इतनी बड़ी घोषणा के बाद क्या सरकार संसद में सीधे कानून लाकर देश के सामने अपनी पूरी योजना रखेगी, या अलग-अलग राज्यों के रास्ते से इसे आगे बढ़ाया जाएगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *