क्या चुनाव आयोग (ECI) और BJP ने मिलकर लोकतंत्र की हत्या की साजिश रच ली है? पश्चिम बंगाल की दमदार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता की सड़कों पर लाखों समर्थकों के साथ एक जबरदस्त रैली निकालकर इसी सवाल को चीख-चीखकर बुलंद किया। धर्मतल्ला से जोरासंको (रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर) तक चले इस मेगा विरोध प्रदर्शन में ममता ने BJP को ‘चोरों का गिरोह’ और ECI को ‘कुर्सी का गुलाम’ करार देते हुए खुलेआम चेतावनी दी: “अगर वोटर लिस्ट से एक भी असली वोटर का नाम कटा, तो नरेंद्र मोदी की सरकार हिल जाएगी। ये सरकार का अंत निश्चित है!” ममता का गुस्सा साफ था – स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को उन्होंने ‘साइलेंट इनविजिबल रिगिंग’ (SIR 2.0) नाम दिया, जो 12 राज्यों-केंद्र शासित क्षेत्रों में मंगलवार से शुरू हो गया है। केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे विपक्षी राज्यों में ये ‘जांच’ चालू, लेकिन BJP शासित असम, त्रिपुरा या पूर्वोत्तर के राज्यों में चुप्पी? “ये भेदभाव क्यों? ये साफ तौर पर सेंट्रल BJP को फायदा पहुंचाने की साजिश है!” ममता ने गरजते हुए कहा।
उन्होंने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को ‘कुर्सी बाबू’ कहकर ललकारा – “2002 में बंगाल का आखिरी SIR दो साल चला, अब एक महीने में खत्म करने की जल्दी क्यों? सिर्फ मोदी बाबू और अमित शाह को खुश करने के लिए?” रैली में संसद अभिषेक बनर्जी समेत अनेकों नेताओं की मौजूदगी थी।
TMC ने SIR को ‘चुपके से वोट चोरी का हथियार’ बताते हुए लोगों से अपील की – BJP के गुर्गे बैंक कर्मचारियों के भेष में डायमंड हार्बर जैसे इलाकों में निजी डेटा इकट्ठा कर रहे हैं, ऐसी किसी भी जानकारी न दें! “लोग डर से मर रहे हैं, नाम कटवा रहे हैं। ये ‘मैपिंग’ का बहाना है, असल में दो करोड़ बंगाली वोटरों को मिटाने की कोशिश!” ममता ने BJP पर इल्जाम लगाया। बंगाली बोलना बांग्लादेशी नहीं बनाता, उर्दू बोलना पाकिस्तानी नहीं – “बंगाल की पहचान का अपमान बंद करो!” उन्होंने कहा। बिहार में SIR से कितने रोहिंग्या मिले? शून्य! फिर ये झूठा प्रचार क्यों?
ममता ने नोटबंदी का जिक्र खींचा – “मैंने विरोध किया था, फिर भी कर दी। लोगों को सिर्फ तकलीफ मिली, माफी तक नहीं मांगीं। ये बेशर्म सरकार!” आधार कार्ड के लिए पैसे लिए, अब कहते हैं ये नागरिकता का सबूत नहीं? “सात बार सांसद, तीन बार CM, चार बार केंद्रीय मंत्री रहने के बाद भी मुझे बांग्लादेशी साबित करना पड़ेगा?” ममता का तंज तीखा था। अमित शाह पर भी निशाना – “वंशवाद का विरोध करते हो, खुद बेटे को ऊंची पोस्ट दो!”
उन्होंने चेताया – असेंबली चुनाव से ठीक पहले ये SIR वोटरों को डराने का हथकंडा है। “अगर चुनाव के बाद करना है तो TMC समर्थन देगी, लेकिन ये तो साफ चुनावी साजिश है!” लड़ाई सिर्फ बंगाल की नहीं, भारत की आत्मा की है – वोट का हक, बिलॉन्गिंग का हक। “सड़कों पर, अदालतों में, जरूरत पड़ी तो दिल्ली तक लड़ेंगे!” ममता ने दहाड़ा। TMC ने वोटर हेल्पडेस्क खोले हैं – नाम कटने से बचाने के लिए।
BJP की ये चाल लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश है, लेकिन ममता चेतावनी दे रही हैं: “वे डील से जीत सकते हैं, धांधली से जीत सकते हैं, लेकिन जनता का मंडेट कभी नहीं!” अगर एक भी वोटर कटा, तो मोदी राज का पतन शुरू। बंगाल जाग चुका है – अब BJP की बारी, कांपने की!




