एबीसी नेशनल न्यूज | 3 फरवरी 2026
आम लोग सिर्फ सूचना दें, कार्रवाई और देश से बाहर भेजना सरकार का काम
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने अवैध रूप से भारत में रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर साफ शब्दों में कहा है कि उनकी पहचान करना और उन्हें देश से बाहर भेजना पूरी तरह सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों का काम सिर्फ इतना है कि अगर कहीं अवैध घुसपैठ की जानकारी मिले, तो वे उसे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं।
मोहन भागवत ने कहा कि इस मुद्दे पर समाज में अनावश्यक भ्रम और तनाव फैलाया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि आम लोगों से यह उम्मीद करना गलत है कि वे खुद जांच करें या किसी पर कार्रवाई करें। यह न तो समाज का काम है और न ही किसी संगठन का, बल्कि सरकार, पुलिस और प्रशासन का संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिकों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए।
भागवत ने यह भी कहा कि भारत कानून से चलने वाला देश है और यहां हर मामले के लिए तय कानूनी प्रक्रिया है। अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से देश में रह रहा है, तो उसकी पहचान, दस्तावेजों की जांच और आगे की कार्रवाई सरकारी तंत्र के जरिए ही होनी चाहिए। समाज की भूमिका शांति बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की है, न कि टकराव पैदा करने की।
उन्होंने यह बात भी रेखांकित की कि अवैध घुसपैठ का मुद्दा मानवता और राष्ट्रीय सुरक्षा—दोनों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसमें संतुलन बहुत जरूरी है। न तो किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान किया जाना चाहिए और न ही देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता होना चाहिए। दोनों के बीच सही रास्ता सिर्फ कानून के दायरे में रहकर ही निकल सकता है।
मोहन भागवत ने दो टूक कहा कि अगर सरकार को कहीं से भी अवैध बांग्लादेशी या रोहिंग्या होने की जानकारी मिलती है, तो कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें देश से बाहर भेजना सरकार की जिम्मेदारी है। समाज को इसमें सहयोग करना चाहिए, लेकिन अंतिम फैसला और कार्रवाई सिर्फ राज्य की ही होनी चाहिए।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश के कई हिस्सों में अवैध घुसपैठ को लेकर बहस तेज है। भागवत के बयान से यह संदेश साफ जाता है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर उकसावे और अफवाहों से दूर रहकर, कानून और व्यवस्था के तहत ही काम किया जाना चाहिए।




