एबीसी डेस्क 26 दिसंबर 2025
उन्नाव दलित बलात्कार मामले में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा (दोषसिद्धि) को निलंबित करने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों का न्यायिक और पेशेवर रिकॉर्ड इस प्रकार है—
न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर
1. गुजरात सरकार की ओर से गोधरा कांड मामले में विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) रहे।
2. राम जन्मभूमि मामले में मंदिर निर्माण के पक्ष में दलीलें देने वाले वकील रहे।
3. मार्च 2025 में दिया गया विवादित बयान:
“ब्राह्मण समुदायों के हिंदू पुनरुत्थानवाद (Hindu Revivalism) से ऐतिहासिक संबंध रहे हैं।”
4. उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया; दोनों 5 वर्षों से बिना ट्रायल जेल में रहे।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद
1. बुलडोज़र कार्रवाई से जुड़ी याचिकाएं खारिज कीं, जिनमें मुस्लिम संपत्तियों को निशाना बनाए जाने के आरोप थे।
2. सद्गुरु जग्गी वासुदेव की ईशा फाउंडेशन पर कथित धोखाधड़ी से जुड़ी आलोचनात्मक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश दिए।
3. उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया; दोनों पिछले 5 वर्षों से बिना ट्रायल जेल में हैं।
बाक़ी जनता इतनी नासमझ नहीं है कि हर फ़ैसले को सिर्फ़ काग़ज़ी आदेश मान ले। लोग सब देख रहे हैं, सब याद रख रहे हैं—किस मामले में किसे राहत मिली, किसे सालों बिना सुनवाई जेल में रखा गया और किन मामलों में संवेदनशीलता अचानक कम हो गई। यह सवाल सिर्फ़ अदालत के आदेश का नहीं, बल्कि न्याय की आत्मा का है। लोकतंत्र में जनता गूंगी नहीं होती; वह समय आने पर सवाल भी पूछती है और निष्कर्ष भी खुद निकालती है। न्याय अगर दिखाई नहीं देता, तो भरोसा टूटता है—और यह टूटन किसी एक फ़ैसले तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे सिस्टम पर असर डालती है।




