नई दिल्ली 31 अक्टूबर 2025
राजनीतिक ब्यूरो रिपोर्ट
चुनावी माहौल के बीच बिहार के SIR (Special Identification Report) को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष का हमला तेज हो गया है। कांग्रेस प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि “हर चुनाव में गृहमंत्री विदेशी मतदाताओं का मुद्दा उठाते हैं, लेकिन जब जवाब देने का समय आता है, तो चुप्पी साध लेते हैं।”
जयराम रमेश ने कहा, “गृहमंत्री बार-बार कहते हैं कि मतदाता सूची में दर्ज विदेशियों को चिन्हित कर हटाया और देश से बाहर किया जाएगा। लेकिन देश जानना चाहता है कि आखिर ये जिम्मेदारी किसकी है — क्या नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है?”
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में दो ‘सीधे सवाल’ रखे हैं —
- क्या भारतीय संविधान के अनुसार नागरिकता तय करना या उसे चुनौती देना चुनाव आयोग का काम है?
- बिहार में चलाए गए SIR अभियान के तहत अब तक कितने ‘विदेशी मतदाता’ या ‘घुसपैठिए’ वास्तव में चिन्हित और हटाए गए हैं?
रमेश ने कहा कि सरकार देश को भ्रमित कर रही है, जबकि चुनाव आयोग की भूमिका केवल मतदाता सूची के सत्यापन तक सीमित है, न कि नागरिकता की जांच तक। उन्होंने कहा, “गृह मंत्रालय चुनावी मंचों पर बयानबाज़ी करता है लेकिन संसद में या सुप्रीम कोर्ट में कभी ठोस आंकड़ा नहीं देता। आखिर बिहार SIR की आड़ में हो क्या रहा है?”
कांग्रेस प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि ‘SIR’ कहीं NRC की एक नई परछाई तो नहीं, जिसे बिहार जैसे राज्यों में धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर सरकार के पास वास्तव में कोई ठोस आंकड़ा है कि मतदाता सूची में विदेशी शामिल हैं, तो देश को बताने में क्या दिक्कत है?”
विश्लेषकों का मानना है कि बिहार SIR पर अब कांग्रेस का यह सवाल सरकार के लिए राजनीतिक असहजता पैदा कर सकता है। एक ओर भाजपा इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा और वैध मतदाता सूची” का मुद्दा बता रही है, वहीं विपक्ष इसे “साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की नई चाल” के रूप में देख रहा है।
जयराम रमेश के इन सवालों ने बहस को नया मोड़ दे दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या गृह मंत्रालय संसद या मीडिया के माध्यम से इन दोनों प्रश्नों का औपचारिक उत्तर देगा — या यह मुद्दा चुनावी बयानबाज़ी के कोहरे में गुम हो जाएगा।




