अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | पेरिस | 18 अक्टूबर 2026
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत के खिलाफ शनिवार को हुए व्यापक प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शन के दौरान लिमोज शहर का ऐतिहासिक टाउन हॉल भीषण आग की चपेट में आ गया और इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों के मुताबिक, इमारत का बड़ा हिस्सा आग में नष्ट हो गया। यह वही ऐतिहासिक भवन था, जो दो विश्व युद्धों के दौरान भी बचा रहा था। देशभर में हुई हिंसा, आगजनी और लूटपाट के बीच 1,200 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की खबर है।
1873 में बना ऐतिहासिक भवन आग की चपेट में
लिमोज का टाउन हॉल 1873 में बनाया गया था और 1883 में इसका उद्घाटन हुआ था। यह शहर की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नकाबपोश प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पहले टाउन हॉल के बाहर खड़ी पुलिस की गाड़ी में आग लगाई। इसके बाद इमारत की खिड़कियां तोड़ी गईं और अंदर आग लगा दी गई।
दमकलकर्मियों ने देर रात आग पर काबू पाने की कोशिश की। क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इमारत को हुए नुकसान को ऐतिहासिक धरोहर के लिए बड़ी त्रासदी बताया और घटना को जानबूझकर की गई तोड़फोड़ करार दिया।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने ऐतिहासिक इमारत को जलते हुए देखा। इस दौरान नगर प्रशासन के एक कर्मचारी को रोते हुए भी देखा गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उन्हें सांत्वना दी।
महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग
फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, शनिवार के प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। वहीं, CGT ट्रेड यूनियन ने यह संख्या आठ लाख तक बताई। प्रदर्शनों के दौरान पेरिस समेत कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं।
पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। कुछ प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ओर वस्तुएं और आतिशबाजी फेंकने के आरोप हैं। पेरिस में कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया और शहर के मध्य हिस्से में धुआं उठता दिखाई दिया।
लियोन में एक पर्यटक कार्यालय में आग लगाए जाने की खबर है। मार्सेई और लिली में नगर भवनों में घुसकर तोड़फोड़ की गई, जबकि बोर्डो में पुलिस परिसर को नुकसान पहुंचाने की सूचना है। पेरिस, मार्सेई, नीस, बोर्डो और लिली सहित कई शहरों में दुकानों में लूटपाट हुई। लिली में एक एप्पल स्टोर को भी लूटे जाने की खबर सामने आई।
जेडी वेंस ने आव्रजन नीति पर उठाए सवाल
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फ्रांस की हिंसा को लेकर पश्चिमी देशों की आव्रजन नीतियों की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आरोप लगाया कि पश्चिमी उदारवादी नेताओं ने विविधता और सहानुभूति के नाम पर विकासशील देशों से बड़ी संख्या में लोगों को अपने देशों में आने दिया, लेकिन उनके समाज में घुलने-मिलने और सांस्कृतिक अनुकूलता से जुड़े सवालों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
वेंस ने कहा कि फ्रांस में हुई घटनाओं से अमेरिका को सबक लेना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति अमेरिकी समाज में भी पैदा हो सकती है।
हालांकि, फ्रांस में प्रदर्शनों के प्रमुख कारणों के रूप में महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत, सार्वजनिक खर्च और सामाजिक असंतोष का जिक्र किया गया है। उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि हिंसा का सीधा कारण आव्रजन ही था।
मैक्रों ने दोषियों पर कार्रवाई का दिया भरोसा
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सरकारी कार्यालयों, दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों पर हमले करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने दिनभर हुई हिंसा को बेहद गंभीर बताया।
प्रशासन के अनुसार, कुछ कट्टरपंथी समूहों ने सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचाया और दुकानों में लूटपाट की। पुलिस ने कई शहरों में सुरक्षा बढ़ाई। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने कहा कि राजधानी की कई सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा है।
येलो वेस्ट आंदोलन की वापसी के संकेत
इन प्रदर्शनों में येलो वेस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया। यह आंदोलन 2018 में ईंधन कर में प्रस्तावित बढ़ोतरी और जीवनयापन की लागत के खिलाफ शुरू हुआ था। आंदोलन का कहना था कि सरकारी फैसलों का सबसे अधिक बोझ ग्रामीण और कामकाजी वर्ग पर पड़ता है, जो रोजमर्रा के कामों के लिए निजी वाहनों पर निर्भर हैं।
इस बार प्रदर्शन की अपील सबसे पहले सोशल मीडिया पर सक्रिय एक व्यक्ति की ओर से सामने आई थी। बाद में येलो वेस्ट समर्थकों और कुछ ट्रेड यूनियनों ने इसमें भागीदारी की। छात्र भी कई सप्ताह से स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों में प्रवेश से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
फ्रांस में छह महीने बाद चुनाव होने हैं। ऐसे में बढ़ती महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष और हिंसक प्रदर्शनों ने सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। फिलहाल प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बहाल करने, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और लोगों की आर्थिक चिंताओं का समाधान करने की चुनौती है।



