एबीसी डेस्क 2 दिसंबर 2025
दुनिया हैरान ‘छोटकू आइंस्टीन’ लॉरेंट सिमॉन्स की प्रतिभा पर
दुनिया में प्रतिभाशाली बच्चों की कमी कभी नहीं रही, लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो मानव क्षमता की सीमाओं को ही पुनर्परिभाषित कर देते हैं। बेल्जियम के लॉरेंट सिमॉन्स ऐसा ही एक नाम हैं—एक ऐसा बच्चा, जिसकी प्रतिभा के सामने विज्ञान समुदाय भी आश्चर्य में डूबा हुआ है। सिर्फ 15 साल की उम्र में क्वांटम फिजिक्स में PhD, दुनिया में शायद ही कोई दूसरा उदाहरण मिल सके। आश्चर्य इस बात का भी है कि लॉरेंट ने यह अविश्वसनीय उपलब्धि उस रफ्तार से हासिल की है, जिसकी कल्पना करना भी सामान्य विद्यार्थियों के लिए कठिन है। उन्होंने केवल 8 साल की उम्र में हाई स्कूल पास किया, 11 साल की उम्र में इंजीनियरिंग ग्रैजुएशन पूरा कर लिया और उसके बाद मात्र 15 की उम्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल कर ली।
लॉरेंट सिमॉन्स को दुनिया आज “Little Einstein” या ‘छोटकू आइंस्टीन’ के नाम से जानती है, लेकिन उनकी प्रतिभा का आरंभ बचपन में ही दिखने लगा था। उनके माता-पिता का कहना है कि लॉरेंट को बहुत छोटी उम्र से ही नंबर, पैटर्न, वैज्ञानिक अवधारणाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स में असाधारण रुचि थी। जहां एक सामान्य बच्चा खिलौनों से खेलता है, वहीं लॉरेंट माइक्रोचिप्स, इलेक्ट्रिकल सर्किट और क्वांटम समीकरणों में घंटों खोया रहता था। उनके शिक्षकों ने शुरुआती वर्षों में ही समझ लिया था कि यह बच्चा एक सामान्य प्रतिभा नहीं, बल्कि एक “प्रॉडिजी” है, जिसकी सीखने की गति, समझ और स्मरण शक्ति असाधारण है।
उनकी डॉक्टरेट रिसर्च क्वांटम फिजिक्स के उस महत्वपूर्ण क्षेत्र से जुड़ी है जो भविष्य की सुपरकंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन और परमाणु-स्तर की ऊर्जा प्रणालियों को बदल सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, लॉरेंट ने क्वांटम एंटैंगलमेंट और ऑप्टिकल क्वांटम सिस्टम्स पर काम किया है—एक ऐसा विषय जिसे समझने के लिए भी वैज्ञानिक जीवनभर मेहनत करते हैं। उनकी रिसर्च टीम कहती है कि लॉरेंट की क्षमता किसी भी अनुभवी वैज्ञानिक के मुकाबले कम नहीं, बल्कि कई मामलों में उससे भी आगे है।
लॉरेंट के जीवन का दूसरा पहलू भी उतना ही रोचक है—उनके माता-पिता ने कभी उन पर पढ़ाई का दबाव नहीं डाला। उन्होंने बार-बार कहा है कि लॉरेंट अपनी मर्जी से पढ़ता है और जब वह थक जाता है तो वीडियो गेम खेलता है, फिल्में देखता है और दोस्तों के साथ समय बिताता है। इससे साफ है कि यह सिर्फ ‘ग़ज़ब की बुद्धि’ नहीं, बल्कि एक संतुलित परिवेश और सही मार्गदर्शन का भी परिणाम है।
दुनिया भर के वैज्ञानिक और विश्वविद्यालय लॉरेंट को आज अपने साथ जोड़ने के लिए उत्सुक हैं। कई शीर्ष संस्थान उन्हें विशेष शोध प्रयोगशालाएँ प्रदान करने का प्रस्ताव दे चुके हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में लॉरेंट सिमॉन्स ऐसे आविष्कार कर सकते हैं जो भौतिकी की दिशा को हमेशा के लिए बदल दें। क्वांटम कंप्यूटर, ऊर्जा प्रबंधन, मेडिकल टेक्नोलॉजी या अंतरिक्ष विज्ञान—किसी भी क्षेत्र में वे क्रांतिकारी योगदान दे सकते हैं।
लॉरेंट की कहानी दुनिया भर के युवा छात्रों और अभिभावकों के लिए एक प्रेरणा है। वह यह साबित करते हैं कि यदि किसी बच्चे के भीतर स्वाभाविक प्रतिभा हो और उसे सही माहौल मिले, तो वह उम्र, सीमाओं और विश्व की स्थापित धारणाओं को भी पीछे छोड़ सकता है। एक ऐसी दुनिया में जहाँ अक्सर कहा जाता है कि “बच्चे अभी छोटे हैं, उन्हें समझ नहीं आता,” वहीं लॉरेंट सिमॉन्स खड़े होकर यह दिखा रहे हैं कि उम्र सिर्फ एक संख्या है—प्रतिभा और जुनून अगर साथ हों, तो 15 की उम्र में भी विज्ञान की दुनिया में तहलका मचाया जा सकता है।
दुनिया उन्हें आज “Little Einstein” कह रही है, लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में शायद उन्हें “Next Einstein” कहा जाए—क्योंकि उनकी कहानी अभी शुरू ही हुई है।




