एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 22 फरवरी 2026
एपस्टीन प्रकरण से जुड़े कथित दस्तावेज़ों और ईमेल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उनकी बेटी हिमायनी पुरी का नाम सामने आने के दावों ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है। आरोपों के केंद्र में हिमायनी पुरी से जुड़ा हेज फंड Realm Partners LLC है, जिसे कम समय में सैकड़ों मिलियन डॉलर की फंडिंग मिलने की बात कही जा रही है। 2014 से 2015 के बीच लगभग 570 मिलियन डॉलर (करीब 5700 करोड़ रुपये) जुटाने के दावों ने निवेश के स्रोत, पारदर्शिता और संभावित संबंधों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि 2014 के कुछ ईमेल्स में जेफ्री एपस्टीन ने कथित तौर पर हरदीप पुरी का उल्लेख किया और उस समय सिलिकॉन वैली से जुड़े कुछ संपर्कों और बैठकों में उनका नाम सामने आया। उस दौर में पुरी संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि थे। इन संवादों में लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन के साथ संभावित बैठकों का भी जिक्र किया गया है, जिनमें एपस्टीन की मौजूदगी सीसी में बताई जाती है।
मामले का सबसे चर्चित पहलू हिमायनी पुरी का पेशेवर करियर और Realm Partners में उनकी भूमिका है। यह फंड रॉबर्ट मिलार्ड से जुड़ा बताया जाता है, जिनका नाम पहले भी एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों में लिया जाता रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2014 में फंड को लगभग 288 मिलियन डॉलर (करीब 2400 करोड़ रुपये) का निवेश मिला, जो अगले वर्ष बढ़कर 570 मिलियन डॉलर से अधिक हो गया। फंड का केमैन आइलैंड्स में पंजीकरण भी बहस का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसे टैक्स हेवन के रूप में जाना जाता है।
सोशल मीडिया पर निवेशकों की पहचान सार्वजनिक करने और स्वतंत्र जांच की मांग तेज हुई है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया है। कई प्रतिक्रियाओं में यह सवाल उठाया जा रहा है कि 2013 में हरदीप सिंह पुरी के आईएफएस से सेवानिवृत्त होने के तुरंत बाद 2014 में हिमायनी पुरी से जुड़ी कंपनी को 30 निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये का निवेश किस आधार पर मिला।
साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि हिमायनी पुरी को Realm Partners LLC में पार्टनर बनाए जाने की प्रक्रिया क्या थी और उनकी रॉबर्ट मिलार्ड से पेशेवर पहचान किन परिस्थितियों में बनी। कुछ चर्चाओं में मिलार्ड के MIT से जुड़े रहने और जोई इटो के साथ उनके कार्यकाल का भी उल्लेख किया जा रहा है, जो पहले एपस्टीन विवाद के संदर्भ में चर्चा में रहे थे।
सोशल मीडिया पर यह प्रश्न भी उठाया गया है कि क्या कंपनी को किसी वैश्विक निवेशक से फंडिंग मिली थी और यदि मिली, तो उसका पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज़ सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
वहीं, हरदीप सिंह पुरी ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनकी सभी मुलाकातें पूरी तरह पेशेवर और आधिकारिक थीं तथा किसी भी तरह के अनुचित संबंध या वित्तीय अनियमितता के आरोप निराधार हैं।
फिलहाल मामले में कोई आधिकारिक जांच या अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन वैश्विक स्तर पर चर्चित एपस्टीन विवाद से जुड़ने के कारण यह मुद्दा राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श में तेजी से उभर रहा है। आने वाले समय में दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता, संभावित जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया से ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




