एबीसी नेशनल न्यूज | 3 फरवरी 2026
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters की एक्सक्लूसिव जांच में एक गंभीर और चिंताजनक तथ्य सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, अरबपति उद्योगपति Elon Musk की कंपनी का प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट Grok ऐसे मामलों में भी लोगों की Sexualized तस्वीरें तैयार करता रहा है, जब यूज़र पहले से स्पष्ट रूप से यह चेतावनी देते हैं कि जिन व्यक्तियों के बारे में सामग्री बनाई जा रही है, उन्होंने इसके लिए कोई सहमति नहीं दी है। रॉयटर्स की यह रिपोर्ट AI तकनीक की जिम्मेदारी, सीमाओं और इंसानी गरिमा से जुड़े सवालों को एक बार फिर केंद्र में ले आती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रॉयटर्स ने कई तरह के परीक्षण किए, जिनमें यूज़र ने साफ शब्दों में लिखा कि संबंधित व्यक्ति ऐसी किसी भी तरह की सामग्री के लिए सहमत नहीं है। इसके बावजूद AI सिस्टम ने ऐसे आउटपुट दिए, जिन्हें Sexualized और आपत्तिजनक माना जा सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों और डिजिटल अधिकारों पर काम करने वालों का कहना है कि यह केवल सॉफ्टवेयर की चूक नहीं है, बल्कि यह सहमति जैसे बुनियादी सिद्धांत की अनदेखी को दिखाता है। उनका कहना है कि डिजिटल दुनिया में सहमति की अहमियत असल जिंदगी जितनी ही होती है, और AI से यही अपेक्षा की जाती है कि वह इस सीमा को समझे और उसका सम्मान करे।
रॉयटर्स की पड़ताल यह भी बताती है कि जैसे-जैसे AI टूल्स तेज़ी से आम लोगों की ज़िंदगी में शामिल हो रहे हैं, वैसे-वैसे निगरानी, नियंत्रण और सुरक्षा इंतज़ाम और भी ज़्यादा ज़रूरी हो गए हैं। जब किसी सिस्टम को स्पष्ट चेतावनी देने के बाद भी वह रुकने को तैयार नहीं होता, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि उसकी सेफ्टी गार्डरेल्स कितनी मज़बूत हैं। टेक नीति से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में कंपनियों को सिर्फ सफाई देने या भविष्य में सुधार का वादा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तुरंत और ठोस सुरक्षा उपाय लागू करने चाहिए।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि AI से बनी Sexualized सामग्री का दुरुपयोग बेहद आसान है। बिना सहमति किसी व्यक्ति से मिलती-जुलती तस्वीरें बनना उसकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, मानसिक दबाव बढ़ा सकता है और ऑनलाइन उत्पीड़न का कारण बन सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में AI को लेकर सख्त नियम-कानून बनाने की मांग तेज़ होती जा रही है, ताकि तकनीक आम लोगों की आज़ादी, सम्मान और निजता के खिलाफ इस्तेमाल न हो सके।
रॉयटर्स की इस रिपोर्ट के बाद टेक इंडस्ट्री में यह बहस भी तेज़ हो गई है कि क्या केवल यूज़र की चेतावनी देना पर्याप्त है, या फिर AI सिस्टम को शुरुआत से ही ऐसे अनुरोधों को पूरी तरह खारिज कर देना चाहिए। कई विशेषज्ञों का साफ कहना है कि सहमति के बिना किसी भी तरह की Sexualized छवि बनाई ही नहीं जानी चाहिए, चाहे वह किसी असली व्यक्ति से मिलती-जुलती क्यों न हो।
कुल मिलाकर, रॉयटर्स की यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट AI के तेज़ी से बदलते दौर में उसकी जवाबदेही और नैतिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। तकनीक जितनी ताकतवर होती जा रही है, उतना ही ज़रूरी यह भी है कि उसे इंसानी मूल्यों और सहमति के दायरे में रखा जाए। अब सबकी निगाह इस पर है कि इस खुलासे के बाद संबंधित कंपनी क्या ठोस कदम उठाती है और क्या AI की दुनिया में सचमुच सहमति और सम्मान को प्राथमिकता दी जाती है।




